जॉर्ज जब छत्तीसगढ़ में बने सरदार जी

रायपुर | संवाददाता: जॉर्ज फर्नांडिस का छत्तीसगढ़ से गहरा रिश्ता था. लेकिन यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि आपातकाल के दौरान जॉर्ज ने छत्तीसगढ़ में कई दिन गुजारे थे और यहीं से उन्होंने एक ट्रक चलाने वाले सिख का वेष बना कर अपने को गिरफ़्तारी से बचाने की कोशिश की थी.

राज्य के समाजवादी नेता स्व. पुरुषोत्तम कौशिक के अलावा किसान नेता आनंद मिश्रा के साथ उनका गहरा रिश्ता था. अविभाजित मध्य प्रदेश के जमाने में समाजवादी आंदोलन के साथियों के साथ मिलना-जुलना और आना-जाना लगा रहता था. लेकिन आपातकाल के दौर में उन्होंने अपने कई दिन छत्तीसगढ़ में गुजारे थे.


25 जून 1975 को जब आपातकाल की घोषणा हुई तो जॉर्ज फ़र्नांडिस दिल्ली में थे और नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में सोये हुये थे. सुबह उन्हें भुवनेश्वर निकलना था. तड़के जब वे भुवनेश्वर की फ्लाइट में बैठे, इसके बाद उन्हें पता चला कि देश में आपातकाल लग चुका है.

जॉर्ज किसी तरह दिल्ली पहुंचे और उसके बाद एक दिन छत्तीसगढ़ के कोरिया ज़िले में वे पहुंचे. वहां वे मनेंद्रगढ़ में अपने एक मित्र के यहां ठहरे. जहां वे लगातार समाजवादी नेताओं के संपर्क में थे. लेकिन सरकार एक-एक कर तमाम विरोधी नेताओं को जेल भेजने का काम कर रही थी.

जॉर्ज फर्नांडिस ने यहीं से ट्रक चलाने वाले सरदार जी का वेष धरा. दाढ़ी-मूंछ तो उग ही गई थी, बस सिर पर पगड़ी भर बांधने की ज़रुरत थी. जॉर्ज ने अपने साथियों की सलाह पर एक सिख के तौर पर ही भेष बदल कर रहना तय किया.

जॉर्ज इसी वेष में देश भर में घूमते रहे. लेकिन बाद में उन्हें कोलकाता के एक चर्च से गिरफ़्तार कर लिया गया.

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