नहीं रहे जॉर्ज फर्नांडिस

नई दिल्ली | डेस्क: देश को हड़ताल का मतलब और मज़दूरों की ताकत समझाने वाले जाने-माने समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस नहीं रहे. देश से विदेशी कंपनी कोकाकोला को भगाने का श्रेय भी जॉर्ज के ही हिस्से था. पिछले कई सालों से अस्वस्थ चल रहे 88 साल के जॉर्ज फर्नांडिस ने मंगलवार को अंतिम सांस ली.

जॉर्ज फर्नांडिस का जन्म 3 जून, 1930 को एक ईसाई परिवार में हुआ था. परिवार वाले उन्हें पादरी बनाना चाहते थे लेकिन जॉर्ज का मोहभंग हो गया. इसके बाद जो कुछ हुआ, वह केवल इतिहास है. राजनीति के लिये जॉर्ज पहली बार 1967 में पहली बार सबसे बड़ी ख़बर तब बने, जब उन्होंने बंबई लोकसभा सीट से कांग्रेस के नेता एस के पाटिल को हराया था. जॉर्ज उस समय मुंबई नगरपालिका में पार्षद हुआ करते थे. उन्होंने पाटिल को 42 हज़ार वोटों से हराया था. ये वो पाटिल थे, जो चुनाव से पहले कहते थे कि मुझे भगवान भी नहीं हरा सकता है.


1973 में जॉर्ज ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फ़ेडरेशन के अध्यक्ष चुने गये और उनके सामने यह बात आई कि एक के बाद एक तीन वेतन आयोग बनने के बाद भी रेलवे के कर्मचारियों की तनख्वाह नहीं बढ़ाई गई है. उसके बाद जॉर्ज ने देश में पहली बार हड़ताल का आह्वान किया.

हड़ताल ऐसी हुई कि सरकार को सेना को मैदान में उतारना पड़ा. देश भर में जन जीवन ठप्प पड़ गया. आंकड़े बताते हैं कि लगभग 30 हज़ार से अधिक लोगों को जेल में ठूंस दिया गया. लेकिन अंततः सरकार को झुकना पड़ा.

जॉर्ज इसके बाद बिहार की ओर मुड़े. बिहार के मुजफ्फरपुर से उन्होंने 1977 में चुनाव जीता. जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें उद्योग मंत्री बनाया गया और उनके कार्यकाल में बहुराष्ट्रीय कंपनियों कोकाकोला और आईबीएम को अपने भारतीय कारोबार बंद करने पड़े क्योंकि उन्होंने सरकारी नियमनों को काफी कठोर कर दिया था.

बिहार में लालू प्रसाद समेत राष्ट्रीय राजनीति में कई क्षेत्रिय क्षत्रपों के उदय होने पर कभी भाजपा और आरएसएस के लंबे समय तक घोर आलोचक रहे फर्नांडीज के भाजपा के शीर्ष नेताओं एलके आडवाणी और वाजपेयी के साथ संबंध बेहतर हुए.

ऐसा माना जाता है कि 1995 में बिहार विधानसभा चुनावों के बाद नीतीश कुमार को भाजपा-नेतृत्व वाले गठबंधन में लाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी.

जब 1999 में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ करगिल युद्ध लड़ा था तो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में फर्नांडीज रक्षा मंत्री थे. फर्नांडीज के कार्यकाल में ही भारत ने 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था.

फर्नांडीज अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित थे, जिस कारण वह पिछले कई वर्षों से सार्वजनिक जीवन से दूर थे और परिवार वाले घर पर ही उनकी देखभाल कर रहे थे.

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