उप्र के राज्यपाल से परेशान हैं अखिलेश

लखनऊ | समाचार डेस्क: अभी कुछ दिनों पहले ही उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक राज्यपाल बने डा.अजीज कुरैशी की सक्रियता सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए मुसीबत बनने लगी है. डा. कुरैशी उत्तराखंड के राज्यपाल भी हैं. उप्र के कार्यवाहक राज्यपाल का दायित्व संभालने के तत्काल बाद डा. कुरैशी ने सूबे की जनता के दुखदर्द को दूर करने के लिए राजभवन में जनता दरबार शुरू किया है. करीब दो घंटे रोज तक चलने वाले उनके इस जनता दरबार में अखिलेश सरकार और यूपी के नौकरशाहों की बेरूखी से नाउम्मीद हुए सैकड़ों लोगों ने अपनी व्यथा डा.कुरैशी को बताई. इसके आधार पर कार्यवाहक राज्यपाल ने बीते गुरुवार को सूबे की कानून व्यवस्था पर चिंता जताई और कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इस पर ध्यान देना चाहिए.

कार्यवाहक राज्यपाल के अनुसार, प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है, खासकर महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध को लेकर. राज्य सरकार को इस पर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है. उप्र की कानून व्यवस्था को लेकर को डा. कुरैशी की इस टिप्पणी से सपा नेता तिलमिला गए हैं.

सपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेश अग्रवाल ने डा. कुरैशी के कथन पर तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने कहा कि राज्यपाल जनता से मिलने तथा सरकार के बारे में सार्वजनिक बयान देने की नई परंपरा डाल रहे हैं, यह अनुचित है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा.लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने भी डा. कुरैशी के राजभवन में जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याओं को सुनने की प्रथा को गलत बताया है. वह कहते हैं कि कार्यवाहक राज्यपाल के राजभवन में जनता दरबार लगाने संबंधी नई व्यवस्था से उप्र में संवैधानिक संकट उत्पन्न हो सकता है.

सपा और भाजपा नेताओं के ऐसे बयानों पर कार्यवाहक राज्यपाल डा. कुरैशी कोई ध्यान नहीं देते. वह कहते हैं, “मैं राजभवन की दीवारों में बंधकर रहने वाले नहीं हूं. मैं राजभवन में जनता दरबार लगाऊंगा. यूपी की कानून-व्यवस्था का जायजा लेने के लिए जिलों का दौरा भी करूंगा. कोई भी ताकत मुझे ऐसा करने से रोक नहीं सकती.”

डा. कुरैशी ने कहा, “उत्तर प्रदेश के जिन गरीब लोगों के जख्मों पर कोई मरहम नहीं लगा रहा है, अगर उनसे मैं मिल रहा हूं तो इससे कुछ लोगों को तकलीफ क्यों हो रही है? वैसे भी सभी पद आम जनता की सेवा के लिए बनाए गए हैं. मैं राज्यपाल की मर्यादा और उसकी कार्य करने की सीमा जानता हूं.”

राजभवन का जनता दरबार राज्यपाल के पद की गरिमा के खिलाफ नहीं है. यह दावा करते हुए कार्यवाहक राज्यपाल कहते हैं कि सूबे के मुख्यमंत्री युवा हैं और उन्हें सभी वर्गों तथा दलों को साथ लेकर चलना चाहिए. संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठकर काम करना चाहिए.

उन्होंने कहा, “मैं उनको कोई निर्देश नहीं दे रहा हूं, मैंने तो बस सुझाव दिया है.”

राज्यपाल के इस कथन और उनकी सोच से साफ है कि उप्र में अखिलेश सरकार के कामकाज पर कार्यवाहक राज्यपाल लगातार नजर रखेंगे और समय-समय पर सरकार की खामियों के बारे में मुख्यमंत्री को बताते रहेंगे.

डा. कुरैशी कहते हैं, “मुझे दरबार लगाने का कोई शौक नहीं है. हां! अंग्रेजों की अपनी सुविधा के लिए बनाई गई लाटसाहबी पसंद नहीं है. मैंने गर्वनर बनने के बाद गर्वनर हाउस से लाटसाहब को बाहर कर दिया है. आम हो या खास, सबके लिए गवर्नर हाउस के दरवाजे खोल दिए हैं.”

बकौल राज्यपाल, “मैं कांग्रेसी तो हूं लेकिन कांग्रेसी गवर्नर नहीं हूं. राज्यपाल राज्य का मुखिया होता है, उसे राजधर्म का पालन करना चाहिए. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी राजधर्म का पालन करने के लिए मेरे रोल मॉडल हैं.”

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