संजय दत्त पर मेहरबान सरकार, जेल प्रशासन

पुणे | मनोरंजन डेस्क: संजय दत्त जेल जाने से बच गये क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने उनकी फरलो बढ़ाने का फैसला आने तक उन्हें जेल से बाहर रहने की इजाजत दे दी है. इससे तय माना जा रहा है कि संजय दत्त के फरलो की अवधि बढ़ने जा रही है. उल्लेखनीय है कि संजय दत्त 24 दिसंबर को फरलो के तहत 14 दिनों की छुट्टी पर पुणे की यरवदा जेल से बाहर आये थे. उन्होंने 27 दिसंबर को ही जेल प्रशासन से और 14 दिनों की छुट्टी मांगी जिस पर अभी तक फैसला नहीं लिया जा सका है. ऐसी सूरत में महाराष्ट्र सरकार के गृह राज्यमंत्री राम शिंदे ने उन्हें जेल प्रशासन का फैसला आने तक बाहर रहने की इजाजत दे दी है. इसीलिये जेल जाने के लिये रवाना हुए संजय दत्त वापस घर लौट आये.

जाहिर है कि महाराष्ट्र सरकार मुंबई बम धमाकों के समय हथियार रखने वाले अभियुक्त संजय दत्त पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है. वैसे 26/11 के आरोपी कसाब को भी मुंबई के जेल में बिरयानी खिलाने के समाचारों के लिये आलोचना होती रही है. एक सजा प्राप्त अभियुक्त पर जेल प्रशासन और सरकार की यह मेहरबानियां समझ से परे है. गुरुवार दोपहर मुंबई स्थित अपने घर से रवाना होने के पहले संजय दत्त ने पत्रकारों से कहा कि उनकी फर्लो बढ़ाने की अर्जी अभी भी प्रक्रिया के अधीन है. उनकी 14 दिन की फर्लो 24 दिसंबर से शुरू हुई थी.

संजय दत्त ने कहा, “27 दिसंबर को मैंने अपनी फर्लो बढ़ाने का आग्रह किया था, जो कि अभी भी प्रक्रिया के अधीन है. अभी तक मेरी फर्लो की मियाद नहीं बढ़ाई गई है, और इसीलिए कानून के मुताबिक मुझे आत्मसमर्पण करना होगा और मैं अभी आत्मसमर्पण कर दूंगा.”

संजय दत्त को पांच साल की सजा सुनाई गई है जिसके 18 माह उन्होंने पूरे कर लिए हैं. 55 वर्षीय अभिनेता ने नवंबर माह में फर्लो की अर्जी दी थी, जिसे स्वीकर्य कर लिया गया था.

जेल से छुट्टी मिलने के बाद संजय दत्त ने अपने परिवार और फिल्म बिरादरी के अपने दोस्तों के साथ समय गुजारा. उन्होंने पत्नी मान्यता, बेटा शहरान और बेटी इकरा के साथ अपनी छुट्टी बिताई.

संजय दत्त के लिए फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी की विवादित फिल्म ‘पीके’ की स्पेशन स्क्रीनिंग भी रखी गई. आमिर खान अभिनीत इस फिल्म में उन्होंने भी एक लघु भूमिका निभाई है. फिल्म देखने के बाद उन्होंने कहा कि एक सच्ची फिल्म होने के नाते उन्हें ‘पीके’ पसंद आई.

इससे पहले महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री राम शिंदे ने संजय दत्त को बार-बार फर्लो मिलने पर सवाल उठाए थे. उन्होंने यह भी जानना चाहा था कि फर्लो के लिए कैसे आवेदन देते हैं, और क्या अन्य कैदियों को भी इस तरह की सुविधाएं दी जा सकती हैं.

अवैध रूप से एके 56 राइफल रखने और इसे नष्ट करने से जुड़े वर्ष 1993 के मुंबई श्रृंखलाबद्ध विस्फोट मामले में संजय दत्त को दोषी पाया गया था. यदि नामी-गिरामी व्यक्तियों पर इसी तरह से मेहरबानियां जारी रही तो इससे बेहतर है कि गांधी को एके 56 राइफल दे दिया जाये क्योंकि कम से कम उन्हें तो सात खून माफ कर दिये जायेंगे.

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