7वां वेतन आयोग अगस्त से लागू

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों को अगस्त माह से बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा. इस अधिसूचना सरकार ने जारी कर दिया है. इसके तहत केन्द्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है. बेशक, सांतवें वेतन आयोग को लेकर कई दावे किये जा रहें हैं परन्तु हकीकत में जितना ढ़ोल पीटा जा रहा है कर्मचारियों को उतना नहीं मिलने जा रहा है.

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को केन्द्र सरकार द्वारा मंजूर किये जाने के बाद न्यूज पोर्टल्स, ई-अखबारों और प्रिंट मीडिया में इस वेतन पुनर्निर्धारण को “ढाई गुना बढ़े वेतन और पेंशन”, “वेतन में 23.5% की बढ़ोत्तरी की मंजूरी” जैसे शीर्षकों से नवाजा गया है.

उल्लेखनीय है कि छठवें वेतन आयोग ने न्यूनतम वेतन 7000 रुपये तय किया था. उसमें 1.1.2016 को लागू 125% महंगाई भत्ता 8,750 रुपये जोड़ने के बाद कुल न्यूनतम वेतन 15,750 रुपये होता है.

जबकि इस वेतन आयोग द्वारा 18000 रुपये न्यूनतम वेतन तय करने का अर्थ हुआ कि कुल बढ़ोत्तरी मात्र 2250 रुपये अर्थात लगभग 14.28% हुई. यही तरीका सरकार को असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, कर्मचारियों के दैनिक वेतन को तय करते समय अपनाना पड़ता है, जिसमें वह हमेशा ही हेराफेरी करती है. इस तरह मूल वेतन में वास्तविक बढ़ोत्तरी 23.55% नहीं है, जैसा कि कुप्रचार है. यह केवल 14.28% है.

सातवें वेतन आयोग से 1 करोड़ से ज्यादा लोग लाभान्वित होंगे. इससे सरकार का खर्च 1 लाख करोड़ रुपये बढ़ जायेगा. यह रकम देश के सकल घरेलू उत्पादन के 1 फीसदी के करीब है. जाहिर है कि इससे बाजार में रुपया आयेगा.

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