उसेंडी पर बरसे माओवादी

हैदराबाद | दिनेश आकुला (छत्तीसगढ़): आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली गुड्सा उसेंडी पर माओवादियों ने गंभीर आरोप लगाये हैं. माओवादियों की दंडकारण्य विशेष क्षेत्र समिति ने समिति के प्रवक्ता गुडसा उसेंडी द्वारा एक महिला माओवादी समेत आत्मसमर्पण करने की निंदा करते हुए उसे गद्दार करार दिया है. ‘ छत्तीसगढ़’ के साथ 14 मिनट के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में समिति के सचिव रामन्ना उर्फ रावुलु श्रीनिवास ने कहा, गुडसा के साथ आत्मसमर्पण करने वाली संतोषी मरकाम एक स्थानीय माओवादी है, उसकी पत्नी नहीं. रामन्ना ने कहा कि उसेंडी की पहली पत्नी सबिता की मौत के बाद 2000 में उसकी दूसरी पत्नी बनी राजे अब भी माओवादी आंदोलन में सक्रिय है.

उसेंडी को सितम्बर 2006 में केन्द्रीय समिति के सम्मेलन में जंगल युद्ध में शामिल किया गया था. रामन्ना ने कहा कि खराब सेहत तो महज एक बहाना है. उसने कहा कि पैसा, पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने का डर और अपनी प्रेमिका के साथ बेहतर जि़ंदगी के लालच ने उसे पुलिस के सामने आत्मसमर्पण को उकसाया है.


माओवादी नेता ने कहा कि सरकार आंदोलन में ऐसे कमज़ोर कडिय़ां ढूंढने की ताक में हमेशा लगी रहती है ताकि उन्हें पैसे और बेहतर जीवन का लालच देकर फोड़ सके. लेकिन आंदोलन खत्म नहीं होगा और सरकार के अत्याचारों के खिलाफ जनता की जीत होगी.

रामन्ना ने कहा कि आत्मसमर्पण के बाद उसेंडी ने मीडिया को जो कुछ बताया वह सब झूठ है, उसमें कोई सच नहीं है उसने यह मुद्दे माओवादी मंचों पर कभी नहीं उठाए.

दंडकारण्य विशेष क्षेत्र समिति के सचिव ने कहा कि आदिवासी इलाकों में लोग ऐसे गद्दारों को जन अदालतों में सजा देने की मांग कर रहे हैं. फोन रखने के पहले रामन्ना ने कहा कि उसेंडी का आत्मसमर्पण न तो पहला है, न आखिरी, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं होगा, और माओवादी ऐसी घटनाओं से सीख लेंगे.

उसेंडी के खिलाफ कड़ी भाषा का उपयोग करते हुए रामन्ना ने आंदोलन को भटकाने और बेहतर जिंदगी के लिए हथियार डालने के लिए उसेंडी की आलोचना की. रामन्ना ने कहा- उसेंडी जिसका असली नाम गुमुदावेल्लि वेंकटकृष्ण प्रसाद है उस पर अर्से से नजर थी. अगर उसे वैचारिक मुद्दों पर कोई ऐतराज़ था तो उसे पुलिस के सामने नहीं, किसी उचित मंच पर उसे सामने लाना चाहिए था.

रामन्ना उसेंडी का जिक्र सुखदेव नाम से कर रहा था. यह उसका एक और नाम है जिसे वह इस्तेमाल करता था. मूलरूप से वारंगल जि़ले का उसेंडी दंडकारण्य विशेष क्षेत्र समिति का सदस्य भी था, और प्रचार और प्रेस इकाई का प्रभारी था. उसने 28 बरस भूमिगत रूप से छत्तीसगढ़ में सक्रिय रहकर बिताए.

वर्ष 1993 से 1996 के बीच उसेंडी आंदोलन छोड़कर अपने सामान्य जीवन की तरफ लौट गया था. माओवादियों ने गहन जांच परख के बाद ही उसे वापस लिया था. वर्ष 1999 में जंगल में एक साथी महिला सदस्य के साथ विवाहेतर संबंधों के कारण उसे उसके पद से हटा दिया गया था. उसकी पहली पत्नी के निधन के बाद केन्द्रीय समिति ने उसे 2000 में राजे से शादी करने की मंजूरी दी थी, लेकिन अन्य महिलाओं की तरफ उसका झुकाव यहां नहीं रुका. उसने संतोषी मरकाम के साथ संबंध बना लिए और आखिरकार उसके साथ भाग गया और आत्मसमर्पण किया.

माओवादियों की प्रतिक्रिया पर आंध्र प्रदेश की पुलिस ने कोई टिप्पणी नहीं की. पुलिस ने कहा कि उसेंडी को पकडऩे के लिए घोषित की गई 20 लाख रुपये की ईनाम राशि उसे मिलेगी. राज्य सरकार की नीति के मुताबिक आत्म समर्पण करने वाले सभी माओवादियों को उनके लिए घोषित ईनाम राशि पुनर्वास के लिए दी जाती है.

पुलिस महानिदेशक प्रसाद राव ने कहा कि केंद्रीय समिति के सदस्य को आत्मसमर्पण करने पर 25 लाख रुपये, और राज्य की समिति एक सदस्य को 20 लाख रुपये दिए जाते हैं. राव ने कहा कि यह पैसा भूमिगत सदस्यों को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुडऩे के लिए प्रोत्साहित करने दिया जाता है. उन्होंने दावा किया कि और भी दूसरे माओवादी अपने हथियार डालने को तैयार हैं.

राव ने कहा कि अभी 275 माओवादी और भूमिगत हैं. इनमें से केवल 77 राज्य में सक्रिय हैं जबकि बाकी छत्तीसगढ़, ओडिशा, और झारखंड में हैं. केन्द्रीय समिति के 17 में से 11 सदस्य आंध्र प्रदेश से हैं. राज्य कभी माओवादियों का गढ़ समझा जाता था. सीपीआई माओवादी के पोलित ब्यूरो के 6 में से 4 सदस्य आंध्र प्रदेश के हैं.

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