मगरमच्छो को कैसे पकड़ेगें जनाब !

रायपुर | विचार डेस्क: दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने आम आदमी को हेल्प लाइन का एक नंबर दे दिया है. जिस पर सरकारी कर्मचारी एवं अधिकारी द्वारा घूस मांगने पर आपकी उस कर्मचारी को पकड़वाने में मदद की जायेगी. निश्चित तौर पर यह आम आदमी पार्टी के सरकार द्वारा उठाया गया सकारात्मक कदम है परन्तु सवाल यह उठता है कि छोटी मछली के लिये बुने जाल से क्या बड़े मगरमच्छो को पकड़ा जा सकता है.

आज सवाल यह नहीं है कि छोटे-छोटे सरकारी बाबूओं का स्टिंग आपरेशन कर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाया जाये. जरूरत है कि बड़े-बड़े कार्पोरेट घरानों द्वार किये जा रहे घूस व घोटालों को कैसे बंद किया जा सकता है. क्या इस प्रकार के हेल्प लाइन नंबर से कामन वेल्थ घोटाला, टू जी घोटाला तथा कोयला खदान आबंटन में की गई गड़बड़ी को पहले से रोका जा सकता था. बिल्कुल भी नहीं, इन बड़े-बड़े घोटालों की भनक तो महा लेखाकार की रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाती है.

बड़े-बड़े घोटालेबाजो को ज्यादा दिनों तक जेल में बंद करके नहीं रखा जा सकता है. इसका उदाहरण है चारा घोटाले में सजा पाये लालू प्रसाद यादव. लालू की बात क्या करे हमारे देश में ऐसी व्यवस्था है कि मुंबई बम धमाकों में सजा काट रहे अपने संजू बाबा बार-बार पैरोल पर रिहा हो जाते हैं. आम आदमी की हालात यह है कि यदि उन्हें एकवबार किसी कारण से जेल भेज दिया गया तो उसी में लंबे तक सड़ने के लिये मजबूर हो जाता है.

हमारी आम आदमी पार्टी से उम्मीद है कि आम आदमी को नहीं खास आदमियों को पकड़वाने के लिये व्यवस्था करे. अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाये गये आंदोलन से आम आदमी इसलिये जुड़ा था कि खास आदमियों के भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जाए. अरविंद केजरीवाल भी खबरिया चैनलों द्वारा चलाये गये स्टिंग आपरेशन की धारा में बह गये हैं.

उन्होंने कहा है कि रोज-रोज ऐसे स्टिंग आपरेशन करिये. क्या होगा यदि रोज स्टिंग आपरेशन किये जाये तो ? कुछ पानी के मीटर रीडर या पानी की जांच करने वाले पकड़ाये जायेंगे. हम तो अरविंद केदरीवाल को तभी बधाई देंगे जब दिल्ली से टैंकर माफियाओं के राज को खत्म कर दिया जायेगा.

जरूरत है उस भ्रष्टाचार को पकड़ने की जो आम आदमी के जेब पर भारी पड़ता है. उदाहरण को तौर पर 8,000 करोड़ रुपये का प्याज घोटले को लीजिये. जिस पर मीडिया की नजर नहीं पड़ी थी. मीडिया में तो रोज प्याज के आसमान छूते दामों के लिये सरकार को कोसा जाता था.

एक दो को छोड़कर किसी ने भी सवाल नहीं उठाया कि केवल पॉच प्रतिशत प्याज के पानी गिरने के कारण खराब होने से पूरे देश में प्याज के भाव 90-100 कैसे हो गये. उस समय प्याज की जमाखोरी करके कुछ व्यापारी घरानों ने 8,000 करोड़ का अतिरिक्त मुनाफा कमाया था. बड़ी पूंजी से चलने वाली मीडिया तो चाहेगी कि आप छोटे-छोटे कारनामों में उलझे रहो तथा बड़े-बड़े घोटाले बदस्तूर जारी रहें.

सवाल जो देशके सामने खड़ा है वह है कि बड़े-बड़े घोटाले तथा भ्रष्टाचार करने वालों को पकड़ा जाये तथा सजा दिलाई जाये ताकि आगे से कोई इसे दुबारा दोहराने की हिम्मत न करे. अरविंद केजरीवाल जी, छोटी-छोटी मछलियों को छोड़कर मगरमच्छों को पकड़ने के लिये जाल बुनिये उससे जनता का भी लाभ होगा तथा उसमें जनता आपका साथ भी देगी.

आम आदमी पार्टी को खास भ्रष्टाचारियों को पकड़ने के लिये चुना गया है. बाबूओं को पकड़ते रहिये हमें कोई एतराज नहीं परन्तु उसके आड़ में बड़ो तो छुपने का मौका न दें.

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