भ्रष्टाचार पर अंकुश कैसे लगेगा ?

भोपाल | एजेंसी: भोजन के पहले निबाले में ही जब कंकड़ आए तो मजा किरकिरा हो जाता है. ठीक यही हाल मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए अमल में लाई जा रही ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हुआ है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक तरफ भ्रष्टाचार के खिलाफ तल्ख तेवर अपनाने का ऐलान किया, तो दूसरी ओर ऊर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ल का निजी सहायक रिश्वत लेते पकड़ा गया.

राज्य में भ्रष्टाचार और घूसखोरी की कहानियां कम नहीं हैं. यहां आलम यह है कि अफसर से लेकर चपरासी तक करोड़ों का मालिक है. यह खुलासा पुलिस के विशेष संगठन लोकायुक्त की कार्रवाइयों से कई बार हो चुका है. इतना ही नहीं, पूर्व और वर्तमान सरकार के कई मंत्रियों के साथ ही भारतीय प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा और वन सेवा के अफसरों के खिलाफ लोकायुक्त में मामले दर्ज हैं.


यह बात अलग है कि भारतीय जनता पार्टी को लगातार तीसरी बार जीत मिलने के चलते भ्रष्टाचार के आरोप व मामलों का खुलासा कोई ज्यादा मायने नहीं रखता है. इसके बावजूद मुख्यमंत्री चौहान ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त तेवर अपनाने का संदेश दिया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. इतना ही नहीं, भ्रष्टाचार होने पर विभागीय प्रमुख सचिव व मंत्री को जिम्मेदार माना जाएगा.

यह एक दुर्योग ही है कि मुख्यमंत्री चौहान ने जहां शुक्रवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर जोर दिया, उसी दिन शाम ऊर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ल का पिछले कार्यकाल में निजी सहायक रहा मयंक श्रोती रिश्वत लेते पकड़ा गया. श्रोती के पकड़े जाने के बाद सरकार व संगठन से जुड़े लोग शुक्ल के बचाव में आ गए हैं.

पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने कहा है कि श्रोती मंत्री का पूर्व पीए है और रिश्वत मामले में शुक्ल को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.

श्रोती की पदस्थापना को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि श्रोती को उसके मूल विभाग विधि विभाग में अब तक वापस नहीं भेजा गया है. वर्तमान में जिन मंत्रियों को दोबारा मंत्रिमंडल में जगह मिली है, उनका पूर्व का स्टाफ ही काम कर रहा है. अगर ऐसा नहीं है तो मंत्री का काम कैसे चल रहा है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है.

विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा है कि मंत्री के पीए का रिश्वत लेते पकड़े जाना एक गंभीर मामला है. ऊर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ल को नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करने वाले मुख्यमंत्री उन्हें तुरंत पद से हटाएं. अगर ऐसा नहीं होता है तो जनता के बीच यही संदेश जाएगा कि इस सराकर की कथनी और करनी में बड़ा फर्क है.

मुख्यमंत्री चौहान द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त तेवर का इजहार करने और उनकी ही सरकार के एक मंत्री से जुड़े व्यक्ति के रिश्वत लेते पकड़े जाने से राजनीतिक विरोधियों को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा हथियार हाथ लग गया है. अब देखना है कि मुख्यमंत्री इसका जवाब किस तरह देते हैं और ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली अपनी बात पर लोगों को यकीन दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं.

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