भारतीय स्वाद लेकर लौटेगा हलीम

हैदराबाद | एजेंसी: हलीम का पर्याय बन चुकी हैदराबाद की रेस्तरां श्रंखला पिस्ता हाउस अब अपने आउटलेट सऊदी अरब में खोलेगी. सऊदी अरब में ही सबसे पहले हलीम व्यंजन बनना शुरू हुआ था. जबरदस्त मांग को देखते हुए पिस्ता हाउस सऊदी अरब में 20 आउट खोलना चाह रही है.

हलीम एक प्रकार का शोरबा है, जो मांस, मसूर की दाल और गेहूं के साथ विभिन्न मसाले मिलाकर बनाई जाती है. यह मूलत: अरब का व्यंजन है और माना जाता है कि मुगलकाल में यह ईरान और अफगानिस्तान से होते हुए भारत पहुंचा था. भारतीय घी, मसाले, सूखे मेवे और पकाने की भारतीय शैली के साथ इसका भारतीयकरण हो गया.

हलीम का उपयोग रमजान के महीने में रोजा खोलने में होता है. मुस्लिम समुदाय में शादियों में भी भोजन से पहले इसे परोसा जाता है. कुछ होटलों में यह साल भर मिलता है. हलीम बनाने में 10-12 घंटे लगते हैं.

यूं तो हलीम कई रेस्तरां में मिल जाता है. लेकिन इस व्यंजन के मामले में पिस्ता हाउस ने पिछले 15 साल में अपनी अलग जगह बना ली है.

पिस्ता हाउस के प्रमुख एम. ए. माजिद ने कहा, “हमें हलीम को वापस उस जगह तक ले जाने के लिए गौरव हो रहा है, जहां इसका उद्भव हुआ था. हमारा स्टोर वहां अगले वर्ष तक चलना शुरू हो जाएगा.”

पिस्ता हाउस हालांकि पिछले कुछ साल से सऊदी अरब में डब्बा बंद हलीम भेजता रहा है.

सऊदी अरब में काम करने वाले हैदराबाद के एक कारोबारी मुमताज अली अकरम ने कहा, “भारतीयों, पाकिस्तानियों और बांग्लादेशियों के बीच पिस्ता हाउस के हलीम की जबरदस्त मांग है. स्थानीय लोग भी इसे पसंद करते हैं.”

पिस्ता हाउस के अमरीका में भी आउटलेट खुल चुके हैं. इसने बेंगलुरू और विजयवाड़ा में भी अपनी रसोई स्थापित कर ली है. अन्य प्रमुख भारतीय शहरों में आपूर्ति श्रंखला कंपनी गति लिमिटेड इसकी आपूर्ति करती है.


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