IDS छत्तीसगढ़: 1000 करोड़ का अनुमान

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में करीब 1 हजार करोड़ का काला धन सरेंडर हुआ है. जानकारों का अनुमान है कि कालाधन घोषित करने की योजना के तहत छत्तीसगढ़ 1 हजार करोड़ रुपयों से ज्यादा का कालाधन सरेंडर किया गया है. इसका सभी तरह के उद्योगों तथा व्यापारियों ने लाभ उठाया. सूत्रों की माने तो छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा बिल्डरों ने अपना कालाधन सरेंडर किया है. गोपनीयता बनाये रखने के लिये विभाग इसकी जानकारी नहीं दे रहा है.

सूत्रों की माने तो छत्तीसगढ़ तथा मध्यप्रदेश में रायपुर में सबसे ज्यादा कालाधन सरेंडर किया गया. कालाधन सरेंडर करने के मामलें में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने भोपाल तथा इंदौर को भी पीछे छोड़ दिया है.


आईडीएस के तहत कालाधन सरेंडर करने के लिये आयकर विभाग ने रायपुर में 2 तथा बिलासपुर में 1 केन्द्र बनाकर आवेदन स्वीकार किये. अनुमान लगाया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ से 2 हजार के करीब लोगों ने कालाधन सरेंडर किया है. अभी तक अधिकृत जानकारी नहीं आई है परन्तु खबर है कि कालाधन सबसे ज्यादा हैदराबाद में सरेंडर किये गये.

हैदराबाद में 13 हजार करोड़ रुपये, मुंबई में 8,500 करोड़ रुपये तथा दिल्ली में 6 हजार करोड़ रुपयों का कालाधन सरेंडर किया गया है. सरकार ने कालेधन पर 45 फीसदी टैक्स अदा करने की शर्त रखी थी. इसके अनुसार छत्तीसगढ़ से सितंबर 2017 तक सरकार को 500 करोड़ रुपयों के करीब का टैक्स मिलने वाला है.

जानकारों का अनुमान है कि छत्तीसगढ़ से प्रत्येक आवेदन पर औसतन 50 लाख का कालाधन सरेंडर किया गया है. राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 1 करोड़ रुपयों का है.

वहीं, देशभर में 64 हजार लोगों ने 65 हजार करोड़ रुपयों के काले धन का खुलासा किया है. देश के भीतर कालेधन की खुलासे की य़ोजना के तहत 1 जून 2016 से 30 सितंबर 2016 के बीच 64,275 लोगों ने 65,250 करोड़ रुपयों के काले धन का खुलासा किया है.

इस तरह से इस योजना के दरम्यान औसतन रोज 541 करोड़ रुपयों का खुलासा हुआ है. योजना के तहत अब तक सामने आये खुलासों से सरकार को कर और जुर्माने के रूप में कुल 29,362.5 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे. इस खुलासे से चालू वित्त वर्ष में सरकारी खजाने में 14,700 करोड़ रुपये आयेंगे.

सरकार ने पिछले साल इसी तरह की एक योजना विदेशों में रखी अद्योषित संपत्ति के खुलासे के लिए भी जारी की थी. हालांकि, उस योजना में ज्यादा सफलता नहीं मिली. उसमें 644 लोगों ने विदेशों में अपनी आय और संपत्ति की घोषणा की जिससे सरकार को 2,428 करोड़ रुपये का कर प्राप्त हुआ.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1997 में कालेधन की घोषणा के लिए तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने स्वैच्छिक आय घोषणा योजना जारी की थी जिसमें सरकार को 9,760 करोड़ रुपये का कर मिला.

जेटली ने कहा, “वर्ष 1997 में योजना से 9,760 करोड़ रुपए का कर जुटाया गया.” हालांकि, उन्होंने कहा कि उस समय की योजना और आईडीएस योजना की तुलना नहीं की जा सकती है क्योंकि ये दोनों योजनाएं अलग-अलग हैं.

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