आंतरिक सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक केंद्र जल्द

मुंबई | एजेंसी: भारत सरकार इन दिनों निजी सुरक्षा कंपनियों के साथ देश की आंतरिक सुरक्षा को पुख्ता बनाने के लिए एक अत्याधुनिक केंद्र स्थापित करने पर काम कर रही है.

देश में सुरक्षा एजेंसियों के बीच संपर्क स्थापित करने की असुविधा, उपयुक्त प्रौद्योगिकी का अभाव जैसी समस्याएं आंतरिक सुरक्षा की चुनौती को गंभीर बना रही हैं जिसके लिए यह अत्याधुनिक केंद्र एक संसाधन केंद्र की तरह कार्य करेगा.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-बंबई (आईआईटी-बी) द्वारा स्थापित किए जा रहे इस केंद्र पर देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके नक्सलवाद, शहरी आतंकवाद एवं साइबर हमलों से निबटने के लिए सुरक्षा प्रौद्योगिकी के निर्माण एवं अनुसंधान की जिम्मेदारी होगी.

इस केंद्र पर स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विकास किया जाएगा जिनका इस्तेमाल पुलिस एवं अर्धसैनिक बल जैसी सुरक्षा एजेंसियां आंतरिक सुरक्षा से निबटने के लिए करेंगी.

दरअसल पिछले एक दशक में भारत की आंतरिक सुरक्षा के स्वरूप में काफी बदलाव आया है. जैसे-जैसे देश के आर्थिक आधार का विकास होता जा रहा है, वैसे-वैसे देश की आंतरिक सुरक्षा अधिक खतरे में मानी जा रही है.

अधिकारियों एवं सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आंतरिक सुरक्षा के लिए विशेष उपकरणों को विकसित किए जाने की जरूरत है. जैसे इस तरह के फोन जो जंगल, पहाड़ों, खनन स्थलों आदि पर भी अच्छी तरह काम कर सकें. इसके अलावा बारूदी सुरंगों का पता लगाने वाले राडार आदि जैसे उपकरणों का विकास करना आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है.

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त सचिव अजय कुमार ने बताया कि आईआईटी-बी द्वारा इस केंद्र पर परिकल्पनापत्र पेश किए जाने के बाद केंद्र की स्थापना की गुंजाइश, कोष एवं उद्योगों की भागीदारी पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करवाई जा रही है.

इस अत्याधुनिक केंद्र के अगुवा आईआईटी-बी के इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी विभाग के अध्यक्ष अभय करंदिकर ने बताया, “केंद्र के स्वरूप का निर्धारण करने के लिए हमने हाल ही में देश भर के आईपीएस अधिकारियों से विचार-विमर्श किया.”

करंदीकर ने बताया कि इस केंद्र को एक संसाधन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की योजना है, जहां सुरक्षा एजेंसियां अपने सुझाव देने, सलाह लेने एवं प्रद्योगिकी से जुड़ी समस्याओं एवं जरूरतों के लिए संपर्क कर सकती हैं.

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