आम हड़ताल का असर, बोनस मंजूर

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: आम हड़ताल के पहले सरकार ने दो साल से अटके बोनस को मंजूर कर लिया है. 2 सितंबर की प्रस्तावित आम हड़ताल जिसमें देशभर से करीब 15 करोड़ कर्मचारियों के भाग लेने का दावा किया जा रहा है, प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार शाम अपने निवास में आपात बैठक की. इस बैठक में केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल तथा श्रम मंत्री बंगारू दत्तात्रेय शामिल थे. केन्द्र सरकार ने इसके बाद मंगलवार को अपने करीब 47 लाख कर्मचारियों के लिये सालाना बोनस का एलान किया, जो पिछले दो सालों से अटका हुआ था.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बारें में जानकारी देते हुये बताया कि सरकार ने अकुशल मजदूरों की दैनिक न्यूनतम मजदूरी 246 रुपये से 42.28 फीसदी बढ़ाते हुये 350 रुपये प्रतिदिन का कर दिया है. इसी के साथ केन्द्रीय कर्मचारियों का साल 2014-15 तथा 2015-16 का बोनस संशोधित मानदंडों के अनुसार जारी किया जायेगा.

इस तरह से केन्द्र सरकार ने अकुशल मजदूरों की मजदूरी 350 रुपये याने माह के 26 दिनों के लिये 9,100 रुपये घोषित कर दी है. जबकि ट्रेड यूनियनों की मांग है कि यह 18,000 रुपये प्रतिमाह होनी चाहिये. इस कारण से ट्रेड यूनियने 2 सितंबर की आम हड़ताल पर अडिग हैं. केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने प्रेस विज्ञप्त्ति जारी कर अपने 2 सितंबर 2016 के आण हड़ताल पर अडिग रहने की घोषणा की है.

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है इस निर्णय पर जल्दी ही अधिसूचना यानी नोटिफिकेशन जारी किया जायेगा. वित्त मंत्री ने बताया कि इंटर मिनिस्टीरियल कमिटी की सिफारिशों के मुताबिक सरकार ने ये फैसला लिया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है सरकार बोनस संशोधन कानून को सख्ती से लागू करेगी और केन्द्रीय कर्मचारियों को संशोधित दर से पिछले 2 साल का बोनस देगी.

वहीं सरकार ने ये भी घोषणा की है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित बोनस भुगतान के मामलों को निपटाने के लिए भी कदम उठाये जाएंगे.

2 सितंबर की आम हड़ताल में सीयू, एटक, इंटक तथा एचएमएस की यूनियनें भाग ले रही हैं जबकि बीएमएस इससे अलग हो गई है.

इऩ मांगों पर हो रही है आम हड़ताल-

1- प्रति माह 18 हजार रूपये की न्यूनतम मजदूरी और उसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ा जाना.
2- मंहगाई रोकने के लिए, पीडीएस सबके लिए एक जैसी तथा खानेपीने की वस्तुओं में वायदा कारोबार, सट्टा बाजार पर प्रतिबंध.
3- बेरोजगारों को रोजगार, रोजगार सृजन के ठोस उपाय तथा सरकारी भर्ती से रोक हटाने.
4- सभी बुनियादी श्रम कानूनों को बगैर किसी अपवाद या छूट के सख्ती से लागू करना. श्रम कानूनों के उल्लंघन पर कड़ा दंड.
5- श्रम कानूनों में मनमाने संशोधनों पर रोक. अब तक किये सभी मजदूर विरोधी मालिकपरस्त संशोधनों की वापसी.
6- सभी श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा का संरक्षण.
7- असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों सहित पूरी कामकाजी आबादी के लिए न्यूनतम पेंशन 3 हजार रुपये महीना.
8- रेलवे, रक्षा, बीमा, बैंक सहित रणनीतिक क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का निर्णय उलटना.
9- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश और रणनीतिक बिक्री के निर्णयों की वापसी.
10- स्थायी काम के ठेकाकरण पर रोक. स्थायी काम के लिए ठेका श्रमिकों को स्थायी कर्मचारी के समान मजदूरी और लाभ.
11- ग्रेच्युटी भुगतान की सीमा की समाप्ति. बोनस भुगतान तथा भविष्य निधि की पात्रता व भुगतान की सभी सीमाओं की समाप्ति.
12- ट्रेड यूनियनो का रजिस्ट्रेशन 45 दिन में अनिवार्य रूप से करना तथा आईएलओ के कन्वेंशन 87 और 98 को अनुमोदित करना.

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