भारत इंटरनेट निरपेक्षता का पक्षधर

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: भारत सरकार के ‘ट्राई’ ने इंटरनेट निरपेक्षता के पक्ष में आदेश दिया है. इससे फेसबुक तथा एयरटेल को झटका लगा है. फेसबुक फ्री बेसिक्स तथा एयरटेल जीरो के माध्यम से इंटरनेट की निरपेक्षता का विरोध कर रहे थे. भारत जैसे देश में जहां 40 करोड़ लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं तथा इसके उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है नेट निरपेक्षता के पक्ष में फैसला देने से, इंटरनेट के माध्यम से भेदभाव करने वालों को कड़ा संदेश मिला है. उल्लेखनीय है कि दुनियाभर में भारत में चीन के बाद सबसे ज्यादा इंटरनेट के उपयोगकर्ता हैं. भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने सोमवार को कहा कि कोई भी कंपनी विषय सामग्री के आधार पर भेदभावपूर्ण डाटा शुल्क पेश नहीं कर सकती है. ट्राई के इस कदम को इंटरनेट निरपेक्षता के समर्थन में और फेसबुक की फ्री बेसिक्स तथा एयरटेल जीरो के विरोध में माना जा रहा है. ट्राई ने अपनी अधिसूचना में कहा, “कोई भी कंपनी विषय सामग्री के आधार पर डाटा सेवाओं के लिए भेदभावपूर्ण शुल्क न तो पेश करेगी और न ही लगाएगी.”

ट्राई ने कहा, “कोई भी सेवा प्रदाता कंपनी किसी भी नाम से किसी भी व्यक्ति के साथ कोई भी ऐसा समझौता नहीं करेगी, जिसके कारण विषय सामग्री के आधार पर विभिन्न तरह के डाटा के लिए भेदभावपूर्ण शुल्क योजना पेश की जाए या उपभोक्ताओं से भेदभावपूर्ण तरीके से शुल्क लिया जाए.”

फेसबुक ने कहा कि उसे इस फैसले से निराशा हुई है, लेकिन वह अलग-थलग रह रहे लोगों को इंटरनेट से जोड़ने की राह की बाधाओं को हटाती रहेगी.

ट्राई अध्यक्ष आर.एस. शर्मा ने कहा कि नए नियम के पीछे मूल सोच यह है कि अधिकाधिक आबादी तक इंटरनेट पहुंच सके.

उन्होंने कहा, “हमारा कहना है कि इंटरनेट लाइन को इस बात से कोई भी मतलब नहीं होना चाहिए कि इससे क्या सामग्री प्रवाहित हो रही है.”

उन्होंने हालांकि कहा कि कुछ अपवाद के भी प्रावधान रखे गए हैं.

फेसबुक के प्रवक्ता ने कहा, “फ्री बेसिक्स के साथ हमारा लक्ष्य है कि अधिकाधिक लोगों को खुले और मुक्त प्लेटफार्म से जोड़ा जाए. इस फैसले से हालांकि हमें निराशा मिली है, लेकिन हम अलग-थलग पड़े लोगों को इंटरनेट और इससे पैदा होने वाले अवसरों से जोड़ने की राह की बाधाओं को हटाना जारी रखेंगे.”

सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक राजन एस. मैथ्यूज ने कहा, “हमें इस बात से निराशा हुई है कि ट्राई ने इंटरनेट निरपेक्षता को पारिभाषित किए बिना डिसक्रिमिनेटरी प्राइसिंग को नकार दिया. हमें उम्मीद थी कि वे हमारे सुझावों पर गौर करेंगे. यह (फ्री बेसिक्स) देश में अरबों अलग-थलग पड़े लोगों को जोड़ने का एक उपकरण था.”

फेसबुक ने एक साल पहले देश में इंटरनेट डॉट ऑर्ग लांच किया था, जिसका नाम बाद में बदलकर फ्री बेसिक्स रख दिया गया था.

इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने ट्राई की अधिसूचना का स्वागत करते हुए कहा, “इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि देश में इंटरनेट निरपेक्षता के बुनियादी सिद्धांतों का पालन किया जाएगा.”

ट्राई ने अपनी अधिसूचना में डिसक्रिमनेटरी प्राइसिंग यानी भेदभावपूर्ण डाटा शुल्क को नकारते हुए डिफरेंशियल प्राइसिंग या जीरो रेटिंग का प्रावधान किया है, जिसका मतलब यह है कि इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियां उपभोक्ताओं के शुल्क की गणना करते समय यह ध्यान नहीं रखेगी कि उपभोक्ता ने कौन-सी सामग्री डाउनलोड की है. यह इंटरनेट निरपेक्षता के लिए काफी जरूरी है. यानी, डाटा के लिए अलग शुल्क होगा.

इंटरनेट निरपेक्षता का समर्थन करने वाले डिफरेंशियल प्राइसिंग को सही ठहरा रहे हैं. इसके विरोधियों का हालांकि कहना है कि यह व्यवहारिक नहीं है, क्योंकि कंपनियों को अवसंरचना पर भारी भरकम निवेश करना होता है.

ट्राई अध्यक्ष ने कहा, “कोई भी कंपनी स्रोत, गंतव्य, एप्लीकेशन या सामग्री के आधार पर भेदभावपूर्ण शुल्क नहीं लगा सकती है.”

ट्राई ने नियम का उल्लंघन करने वालों के लिए रोजाना 50 हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान किया है, जो अधिकतम 50 लाख रुपये तक हो सकता है.

फ्री बेसिक्स सेवा और एयरटेल जीरो जैसे एप को देखते हुए ट्राई के फैसले का लंबे समय से इंतजार था. ये एप उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट से जोड़कर समाचार, स्वास्थ्य, यात्रा, रोजगार, खेल, संवाद तथा अन्य सूचनाएं मुफ्त देने का वादा करते हैं.

नेट न्यूट्रॅलिटी क्या है?

हमें इंटरनेट के डेटा प्लॅन्स के बारें में जानकारी है. हम मेगाबाइट (MB), गीगाबाइट (GB) इस यूनिट में Net Packs लेते है लेकिन आज-कल खास वाट्सएप, फेसबुक वाले प्लॅन्स टेलीकॉम कंपनfयों ने लाये है. कुछ प्लॉन्स तो खास गुगल के उपयोग के लिए हैं और कुछ तो खास यूटुब के उपयोग के लिए हैं. यह जो झोल टेलीकॉम कंपनिया कर रहीं है, इस झोल को सुलझाने के लिए “नेट न्यूट्रॅलिटी” जरूरी हैं.

इंटरनेट पर हर एक बाइट एक ही जैसा होता है. फिर आप वाट्सएप, फेसबुक का उपयोग करें या युटुब के विडिओ देखे या चाहें आप समाचार पत्र पढ़ें. आप विकिपीडिया पर कुछ खोज रहें हो, या गाने डाऊनलोड कर रहें हो. बिल तो जितना डेटा उपयोग हुआ उसके उपर आना चाहीए, चाहें आप कौन सी भी साईट क्यों ना खोलें.

उदाहरण तौर पर आपने बिजली का कनेक्शन लिया हैं. अब आप उस बिजली का उपयोग किस काम के लिए करेंगे वो आप पर निर्भर है. आप अपने घरों में बल्ब लगा सकते हैं, टी.व्ही. के लिए बिजली का उपयोग कर सकते हैं, फ्रीज, वाशिंग मशीन जैसे उपकरण चलाने के लिए आप बिजली का उपयोग कर सकते हैं. विद्युत् कंपनियों को बिजली का कितना उपयोग हुआ हैं इससे मतलब हैं. बिजली का हमने कहाँ उपयोग किया इससे उनको कोई लेना देना नहीं है. बिजली का जितना उपयोग हुआ हैं, उस हिसाब से हमें बिल की भुगतान करनी पड़ेगी. इसी तरह इंटरनेट के उपयोग के लिए मुक्तता होना, इसे “नेट न्यूट्रॅलिटी” कहतें हैं.

ट्राई की डाटा शुल्क व्यवस्था के मुख्य बिंदु-

– ऐसा कोई समझौता नहीं, जिसकी वजह से डाटा सेवा में भेदभावपूर्ण शुल्क को बढ़ावा मिले.

– इंटरनेट संपूर्ण आबादी को बिना भेदभाव के सुलभ होना चाहिए.

– स्रोत, गंतव्य, एप्लीकेशन और विषय सामग्री के आधार पर अलग-अलग शुल्क नहीं.

– आपात स्थिति के लिए अपवाद का प्रावधान.

– अपवाद की स्थिति में लिए गए शुल्क की जानकारी सात दिनों के भीतर ट्राई को देना जरूरी.

– नियमों के प्रत्येक उल्लंघन के लिए रोजाना 50 हजार रुपये की दर से जुर्माना, जो अधिकतम 50 लाख रुपये हो सकता है.

– भेदभावपूर्ण शुल्क से छोटे कंटेंट प्रदाताओं को नुकसान.

– भेदभावपूर्ण शुल्क से प्रवेश की बाधा पैदा होती है और नवाचार कुंठित होता है.

– ये सेवा प्रदाता कंपनी को नियंत्रणकारी बना सकता है.

– यह भाषण देने और अभिव्यक्ति की आजादी और मीडिया बहुलवाद के विरुद्ध है.

– नियम की दो साल पर या उससे पहले समीक्षा होगी.

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