भारत-ईरान व्यापार की संभावनाएं

नई दिल्ली | एजेंसी: भारत का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही ईरान जाकर तेल के एवज में भुगतान प्रणाली पर चर्चा करेगा. इस सप्ताह पश्चिमी शक्तियों और ईरान के बीच हुए परमाणु करार के बाद यह कदम उठाया जा रहा है. लेकिन उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि समझौते के असर के बारे में कोई भी अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी.

ईरान के साथ भारत की विशेष व्यापारिक व्यवस्था में ही प्रतिबंधों से छूट मिलने की स्थिति में भारत के लिए संशयात्मक स्थिति सन्निहित है. अमरीकी प्रतिबंध के हटने के बाद ईरानी तेल की खरीदारी का रास्ता भारत, चीन और सात अन्य अर्थव्यवस्थाओं के लिए खुल जाता है. प्रतिबंध की दशा में विशेष व्यवस्था की गई थी.


अमरीकी प्रतिबंध के कारण ईरान के लिए कच्चे तेल के बदले डॉलर में भुगतान लेना कठिन हो गया था इसलिए ईरान और भारत ने जून 2012 में वस्तु विनिमय करार किया था. इसके तहत भारतीय तेल आयातक एक भारतीय बैंक में रुपया जमा करते थे और चावल एवं अन्य वस्तुओं के निर्यातक ईरान में अपनी खेप पहुंचाने के बाद उस खाते से कोष की निकासी करते थे.

तेहरान के लिए भुगतान प्रणाली के सामान्य होने से भारत-ईरान वस्तु विनिमय व्यापार प्रणाली पर विपरीत असर पड़ने की आशंका प्रबल है. ईरान की नई सरकार कच्चे तेल के लिए 45 प्रतिशत से अधिक रुपये में भुगतान नहीं लेना चाहती है. रुपये में होने वाले व्यापार के कारण भारत के प्रतिस्पर्धी लाभ के खत्म होने का खतरा है क्योंकि ईरान को होने वाले चावल और सोया आटे के निर्यात में भारतीय एकाधिकार को डॉलर व्यापार से प्रतिद्वंद्वी आपूर्तिकर्ताओं से चुनौती मिल सकती है.

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