देश को चाहिए हज़ारों मिल्खा सिंह

नई दिल्ली | एजेंसी: राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतने वाले महान एथलीट मिल्खा सिंह ने कहा है कि देश में कांट्रेक्ट आधार पर खेल प्रशिक्षकों की नियुक्ति और हर राज्य में एथलेटिक्स को समर्पित अकादमियों की स्थापना होनी चाहिए जहां युवाओं को प्रशिक्षित किया जा सके. उनके अनुसार इसके बगैर भारत एथलेटिक्स में कभी भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकता.

राष्ट्रीय स्तर की स्कूल चैम्पियनशिप स्र्पोर्ट्समेंटर्स के उद्घाटन के अवसर पर मिल्खा ने कहा, “हमें कांट्रेक्ट पर कोच रखने होंगे. वे ज्यादा जवाबदेह होंगे. हमें उन्हें चार से आठ साल का कांट्रेक्ट देना होगा और कहना है कि इस दौरान उन्हें परिणाम देना होगा.”


मिल्खा ने भारतीय कोचिंग प्रणाली की आलोचना की और कहा कि हर क्षेत्र में कोचों को और अधिक दवाबदेह बनाना होगा. उन्होंने यह भी कहा भारत की जनसंख्या को देखते हुए उन्हें हैरानी होती है कि 1960 के बाद से हमारे पास मुट्ठी भर अच्छे एथलीट रहे हैं. हमें असल में हजारों मिल्खा सिंह और हजारों पीटी उषा की जरूरत है.

बकौल मिल्खा सिंह, “भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. हमें युवा प्रतिभाओं को कम उम्र में ही चुनना होगा और उन्हें अच्छा खाना और बेहतरीन प्रशिक्षण देना होगा. साथ ही साथ इन अकादमियों में इन बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए.”

मिल्खा सिंह ने तीन ओलम्पिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है. वह 1956 के मेलबर्न ओलम्पिक, 1960 के रोम ओलम्पिक और 1964 के टोक्यो ओलम्पिक में देश के लिए दौड़े थे.

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