भारत-अमरीका स्वभाविक साझेदार: ओबामा

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: बराक ओबामा ने कहा कि कुछ मुद्दों पर असहमति के बावजूद भारत-अमरीका स्वभाविक साझेदार हैं. अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत और अमरीका को ‘सच्चे वैश्विक साझीदार’ के रूप में देखते हैं और उनका भारत दौरा उनके इस दृष्टिकोण को समझने का माकूल अवसर है. ओबामा ने पत्रिका ‘इंडिया टुडे’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव और दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करने की उनकी प्रतिबद्धता ने हमें अपनी साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर प्रदान किया है.”

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मैंने अपने पूर्व के दौरे में भारतीय संसद में दोनों देशों के संबंधों को लेकर जो कहा था, उसे सही मायने में समझने का समय आ गया है. यही वजह है कि मैंने भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनने का अनुरोध स्वीकार कर लिया और ऐसा करने वाला मैं अमरीका का पहला राष्ट्रपति हूं.”


अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शुक्रवार को भारत-अमरीका संबंध को 21वीं सदी के लिए ‘निर्णायक’ करार देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध को मजबूती देना उनकी विदेश नीति का मुख्य हिस्सा रहा है. ओबामा ने ‘इंडिया टुडे’ पत्रिका को दिए साक्षात्कार में कहा, “मेरे पदभार ग्रहण करने के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध को मजबूती देना मेरी विदेश नीति का मुख्य हिस्सा रहा है.”

क्या वह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बर्बाद हुए समय की भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं? ओबामा ने कहा, “मैं अमरीका का राष्ट्रपति बनने के कुछ समय बाद ही भारत दौरे पर पहुंचा था, क्योंकि मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि अमरीका और भारत के साथ संबंध 21वीं सदी में निर्णायक हो सकते हैं.”

अमरीका के राष्ट्रपति तीन दिवसीय दौरे पर रविवार को भारत पहुंचने वाले हैं. उन्होंने कहा, “हम स्वाभाविक साझीदार और दो महान लोकतंत्र हैं. हमारी ताकत सत्ता और जनता की संभावनाओं में मौजूद है. एक उद्यमी समाज के रूप में हम नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेता हैं.”

उन्होंने कहा, “भारत के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को देखते हुए हम अपने एशिया-प्रशांत में सुरक्षा और समृद्धि को लेकर साझेदारी बढ़ा सकते हैं. जब भारत और अमरीका साथ हैं तो दोनों देश और विश्व ज्यादा सुरक्षित और समृद्ध है.”

ओबामा ने कहा कि जब उन्होंने 2010 में अपने भारत दौरे के दौरान भारतीय संसद को संबोधित किया था तो उन्होंने अपने इस दृष्टिकोण को पेश किया था कि ‘किस प्रकार हम वैश्विक चुनौतियों से दो-चार होते हुए वैश्विक साझीदार बन सकते हैं.’

बराक ओबामा ने स्वीकारा कि भारत और अमरीका कुछ मुद्दों पर असहमत हो सकते हैं, लेकिन ऐसे मतभेद पारस्परिक सम्मान की भावना से सुलझाए जा सकते हैं. ओबामा ने इंडिया टूडे पत्रिका को दिए साक्षात्कार में कहा है, “दो देश सभी मुद्दों पर सहमत नहीं हो सकते और इसलिए बेशक भारत और अमरीकाअसहमत होंगे. लेकिन मेरा मानना है कि आपसी हितों की भावना से हम किसी भी मतभेद के बीच काम कर सकते हैं.”

उन्होंने कहा, “हमारे बीच चाहे किसी भी तरह के मतभेद रहे हों, हमारे ढेरों साझा हित उससे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.”

अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि इसके लिए न सिर्फ नेताओं, बल्कि सरकारों के बीच अच्छे संवाद और समन्वय की जरूरत होगी.

उन्होंने कहा, “अगर हम नेतृत्व के स्तर पर काम करने को सहमत हो, तो हमारी सरकारों को हमारे फैसले लागू करने होंगे. हमें सुनिश्चित करना होगा कि हमारे वचन हमारे कार्यरूप में तब्दील हों.”

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