BBC से ख़फा सरकार

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: मना करने के बावजूद ‘निर्भया कांड’ पर बनी वृत्तचित्र को प्रसारित करने से केन्द्र सरकार खफ़ा है. उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश ब्रोडकास्टिंग कार्पोरशन ने दिल्ली में 16 दिसंबर, 2012 को एक युवती के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर आधारित अपने वृत्तचित्र का अदालत के प्रतिबंध के बावजूद प्रसारण कर दिया. प्रसारण के बाद गुरुवार को गृह मंत्रालय ने बीबीसी को कानूनी नोटिस भेजा है. वहीं, इस वृत्तचित्र के प्रसारण के समर्थन में भी कई आवाजें उठ रही हैं. कुछ लोगों का कहना है कि फिल्मकार संदेशवाहक होता है, उसने अपना काम किया, उसका कोई कसूर नहीं है.

‘इंडियाज डाउटर’ नामक इस वृत्तचित्र को ब्रिटिश फिल्मकार लेस्ली उडविन ने बनाया है. इस वृत्तचित्र में दुष्कर्म के छह दोषियों में से एक मुकेश सिंह का साक्षात्कार दिखाया गया है. पीड़िता को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था, जहां एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी. बीबीसी के इस वृत्तचित्र पर भारत में बावेला मचा हुआ है.


इस वृत्तचित्र को महिलाओं के कुछ समूह इसके प्रसारण पर प्रतिबंध की मांग कर रहे थे और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी चैनलों को आदेश दिया था कि वे इस वृत्तचित्र का प्रसारण न करें. वहीं दूसरी ओर, बीबीसी ने बुधवार देर रात इसका प्रसारण कर दिया.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ने बीबीसी से कहा था कि वह इस वृत्तचित्र को प्रसारित न करे.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हमने बीबीसी से कहा था कि वे इसका प्रसारण न करें, पर उन्होंने इसका प्रसारण किया. वह एक स्वायत्त संगठन है. हम मामले की जांच कर रहे हैं और अगर किसी भी तरह से नियम और शर्तो का उल्लंघन किया गया तो कार्रवाई करेंगे.”

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, “हमने बीबीसी को पत्र लिखकर कहा था कि वे इसका प्रसारण न करें, लेकिन उन्होंने हमें कहा कि इसे भारत में नहीं दिखाया जाएगा और इसका प्रसारण कर दिया.”

उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा, “बीबीसी ने इस वृत्तचित्र को आठ मार्च को प्रसारित करने का फैसला लिया था, लेकिन उन्होंने इसे चार मार्च को ही प्रसारित कर दिया आखिरकार इतनी जल्दी क्या थी.”

सरकार यूट्यूब और सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो के प्रसारण को प्रतिबंधित करने पर विचार कर रही है.

अधिकारी ने कहा, “उन्होंने हमें कहा था कि भारत में इसे नहीं दिखाया जाएगा, लेकिन यह यूट्यूब पर उपलब्ध है. इस मामले की जांच की जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.”

पीड़िता के परिजनों ने कहा कि वे इस वृत्तचित्र को प्रसारित करने के खिलाफ थे.

दुष्कर्म पीड़िता के पिता ने आईएएनएस से कहा, “मैं इस बात से आश्चर्यचकित हूं कि अदालत द्वारा प्रसारण पर रोक के बावजूद बीबीसी ने इस वृत्तचित्र को प्रसारित किया और बाद में यूट्यूब पर भी अपलोड कर दिया. बीबीसी ने भारत के लोगों के गौरव को ठेस पहुंचाई है. बीबीसी के इस कृत्य से साफ है कि उसे भारत के कानून और हमारे देश का कोई भय नहीं है.”

पीड़िता के पिता ने कहा कि वृत्तचित्र बनाने से पहले बीबीसी के फिल्म निर्माता उनसे मिले थे, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया था कि वह दोषी का साक्षात्कार लेंगे.

पीड़िता के पिता ने कहा, “वृत्तचित्र बनाने के बाद वे मेरे पास आए थे. वृत्तचित्र रिलीज करने से पहले वह एक कागज पर मेरे हस्ताक्षर चाहते थे, लेकिन मैंने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था.”

केंद्र सरकार ने गुरुवार शाम को 16 दिसंबर 2012 के सामूहिक दुष्कर्म मामले पर बनाए गए वृत्तचित्र पर बीबीसी को कानूनी नोटिस भेजा है.

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “वृत्तचित्र मामले में बीबीसी को एक कानूनी नोटिस भेजा गया है और हमें उनके जवाब का इंतजार है.”

यूट्यूब पर गुरुवार के कुछ शुरुआती घंटों के लिए उपलब्ध बीबीसी के इस वृत्तचित्र को कई लोगों ने देखा. वृत्तचित्र के प्रसारण पर प्रतिबंध के खिलाफ फिल्मी दुनिया की कई हस्तियां विरोध में आईं, वहीं कुछ ने इसे ‘शुतुर्मुर्ग मानसिकता’ का संकेत बताया.

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता वृंदा करात ने कहा कि वह वृत्तचित्र पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं हैं.

वृंदा ने आईएएनएस से कहा, “मैंने वृत्तचित्र को देखा है. यह दमदार और मार्मिक है. इसमें किसी भी चीज को सनसनीखेज नहीं बनाया गया है. हमारे देश में कुछ चीजें हैं जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ निहित हैं.”

उन्होंने कहा, “यह चौथी दफा है जब सरकार ने किसी वृत्तचित्र को बिना देखे प्रतिबंधित किया है.”

बीबीसी की ओर से विवादास्पद वृत्तचित्र ‘इंडियाज डाउटर’ का प्रसारण किए जाने के कुछ घंटों बाद गुरुवार को ट्विटर पर ‘इंडियाज डाउटर’ हैश टैग, टॉप ग्लोबल ट्रेंड बन गया.

दो अन्य हैश टैग ‘निर्भया इंसल्टेड’ और ‘डॉन्ट रेप अगेन’ भी क्रमश: दूसरे व चौधे पायदान पर ट्रेंड कर रहे हैं.

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