भारत की नई उड़ान

भुवनेश्वर | समाचार डेस्क: मंगलवार को पृथ्वी-2 मिसाइल तथा इसके दो दिन पहले जीएसएलवीडी-5 को सफलता से भारत ने अपनी सैन्य और अंतरिक्ष क्षमता का प्रदर्शन किया है. तीन दिनों के भीतर भारत ने समूचे दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

इसके लिये भारत के वैज्ञानिक धन्यवाद पाने के पात्र हैं. यह भारतीय वैज्ञानिकों की सफलता तथा लगन है कि शांति का पक्षधर होने के बावजूद भी भारत किसी भी सैन्य हमले का मुंहजोड़ जवाब देने के काबिल है. इतना ही नहीं भारत की क्षमताओं में दिनों दिन बढ़ोतरी भी हो रही है.

भारत ने ओडिशा के सैन्य अड्डे से सतह से सतह तक मार करने वाले परमाणु क्षमता संपन्न पृथ्वी-2 मिसाइल का मंगलवार को सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया है. यह जानकारी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी.

भारत में बनी यह बैलिस्टिक मिसाइल 350 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता रखता है और इसका परीक्षण बालासोर जिले के समुद्र पर स्थित चांदीपुर के इंटेग्रेटेड टेस्ट रेंज में किया गया. टेस्ट रेंज के निदेशक एम.वी.के.वी. प्रसाद ने बताया, “यह परीक्षण नियमित प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में सेना द्वारा किया गया है. यह परीक्षण सफल रहा और मिसाइल का पूरी क्षमता के साथ परीक्षण किया गया.”

पृथ्वी देश की स्वेदश निर्मित पहली बैलेस्टिक मिसाइल है. यह देश के इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत विकसित की जा रहीं पांच मिसाइलों में से एक है. युद्ध क्षेत्र में 483 सेकेंड में 43.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचने वाली यह मिसाइल अपने साथ 500 किलोग्राम वजनी मुखास्त्र वहन कर सकती है.

यह मिसाइल एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल्स को मात देने की क्षमता रखती है और इसमें कौशल क्षमताओं के साथ एक उन्नत जड़त्वीय मार्गदर्शन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है. यह कुछ मीटर की सटीकता के साथ अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती है.

यह विश्वभर के इसी तरह की अन्य मिसाइलों की अपेक्षा ज्यादा विनाशकारी प्रभाव छोड़ती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी सटीकता को इसे विकसित करने के दौरान के उड़ान परीक्षणों में पहले ही प्रदर्शित किया जा चुका है.

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