तिल के लड्डुओं पर महंगाई की मार

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ की राजधानी में लोग इन दिनों मकर संक्रांति की खरीदारी में लगे हुए हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति में तिल के लड्डुओं का सबसे ज्यादा महत्व है. इसके मद्देनजर बाजार में सभी जगह तिल के लड्डू छाए हुए हैं, लेकिन इस बार तिल महंगा होने के कारण बिक्री जोर नहीं पकड़ रही है.

तिल और उससे बने लड्डुओं के दामों में कितनी बढ़ोतरी हुई, इसका पता लगाने के लिए विजन न्यूज की टीम ने प्रमुख बाजारों का दौरा किया. पता चला कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार तिल व तिल के लड्डुओं की कीमत दोगुनी हो गई है.

यहां के गोलबाजार में तिल का व्यवसाय करने वाले रत्नेश सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने जहां तिल 90 रुपये से 120 रुपये प्रतिकिलो बेचा, वहीं इस बार दाम दोगुने हो गए हैं. तिल के दाम 140 से लेकर 210 रुपये तक पहुंच गए हैं.

वहीं तिल के लड्डू व पापड़ी बेचने वाले ज्ञानेश राव का कहना है कि इस बार तिल के लड्डू और पापड़ी की कीमत दोगुनी हो गई है. ये 150 से 200 रुपये के बीच बिक रही हैं.

गोलबाजार के एक थोक व्यापारी सूरज धनवार ने बताया कि तिल आमतौर पर महाराष्ट्र और ओडिशा से आता है. वहीं थोड़ा-बहुत ही आपूर्ति छत्तीसगढ़ से हो पाता है.

सूरज के अनुसार, तिल की किस्म के आधार पर उसकी कीमत तय होती है. उन्होंने बताया कि इस समय गुजरात से आने वाले तिल के लड्डू व पापड़ी को लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं और उसकी मांग भी ज्यादा बनी हुई है.

गोलबाजार में मकर संक्रांति की खरीदारी के लिए पहुंची आयुषी मेहरा का कहना है कि दाम इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि अब सोचना पड़ रहा हैं कि क्या-क्या चीज बनाएं और क्या न बनाएं.

उनका कहना है कि आए दिन महंगाई बढ़ रही है, जिस वजह से लोगों को अपना मन मारकर कम चीज बनाकर संतुष्ट होना पड़ रहा है. वहीं भावना जायसवाल का कहना है कि महंगाई जिस प्रकार से बढ़ रही है उसे देखकर तो आने वाले दिनों में त्योहार मनाने के लिए भी एक मध्यम परिवार को सौ बार सोचना पड़ेगा.

तिल के बढ़े हुए दामों पर गोलबाजार के थोक व्यापारी सूरज धनवार, रत्नेश सिंह व ज्ञानेश राव सहित अन्य व्यापारियों का कहना है कि दाम बढ़ रहे हैं उस पर स्थानीय व्यापारी कुछ नहीं कर सकता है. इसका कारण बाहर से आने वाले तिल की कम आपूर्ति है.

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