राज छुपाने इशरत की हत्या

अहमदाबाद: सीबीआई ने इशरत जहां मुठभेड़ मामले में चार्जशीट दाखिल कर कहा है कि उसका एनकाउंटर फर्जी था और उसके आतंकवादी होने के कोई सुबूत नहीं मिले हैं. सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि इशरत जहां को सिर्फ इसीलिए मारा गया क्योंकि उसने आईबी अफसरों को कश्मीरी आतंकवादी अमजद अली राणा का अपहरण करते हुए देख लिया था.

अहमदाबाद कोर्ट में दाखिल इस चार्जशीट में सीबीआई ने गुजरात पुलिस के अधिकारियों डी.जी.वंजारा, एन.के.अमीन, पी.पी.पांडेय, तरुण बरोट, अनाजु चौधरी के नाम शामिल हैं जिन पर आपराधिक साजिश, हत्या, हत्या की साजिश, अपहरण और अवैध कारावास में रखने के आरोप लगाए गए हैं.

सीबीआई ने फिलहाल इस चार्जशीट में किसी भी इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (आईबी) अफसर या राजनेता का नाम स्पष्ट रूप से इसमें शामिल नहीं किया गया है लेकिन उसके पास मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करने का विकल्प मौजूद है जिसके द्वारा वो और लोगों के नाम भी इसमें शामिल कर सकती है.

सीबीआई ने आईबी अफसरों और गुजरात पुलिस की मिलीभगत होने की बात की है और बताया है कि इस एनकाउंटर को मैनेज करने की जिम्मेदारी गुजरात पुलिस के अधिकारियों की थी और ये तत्कालीन पुलिस उप महानिरीक्षक डी.जी.वंजारा की देखरेख में किया गया था.

अपने आरोप पत्र में उस समय के घटनाक्रम की जानकारी देते हुए सीबीआई ने बताया है कि राजेंद्र कुमार के नेतृत्व वाली आईबी टीम ने पहले दो पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया और बाद में इशरत और उसके एक साथी को भी गिरफ्तार कर दो-तीन सप्ताह तक हिरासत में रखा फिर गुजरात पुलिस के हवाले कर दिया.

गुजरात पुलिस ने पहले इशरत को छोड़ दिया लेकिन बाद में उसे दोबारा एक निर्जन स्थान पर बुलाकर जावेद, अमजद और जौशीन के साथ गोली मार दी और हथियारों की बरामदगी दिखा कर दावा किया कि ये चारों नरेंद्र मोदी की हत्या के उद्देश्य से अहमदाबाद आए थे.

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