जबलपुर HC: प्रमोशन में आरक्षण खत्म

जबलपुर | समाचार डेस्क: जबलपुर उच्च अदालत ने सरकारी नौकरियों में प्रमोशन पर आरक्षण को अवैध करार दिया. जबलपुर उच्च न्यायालय के इस पैसले से मध्य प्रदेश के करीब 20 हजार अधिकारी-कर्मचारी प्रभावित होगें. चीफ जस्टिस एएम खानविलकर व जस्टिस संजय यादव की युगलपीठ ने पब्लिक सर्विस (प्रमोशन) नियम 2002 को चुनौती देने वाली 22 याचिकाओं का निराकरण करते हुए इस नियम के तहत 2002 के बाद हुई एससी, एसटी कर्मचारियों, अधिकारियों की पदोन्नतियां निरस्त कर दी है.

भोपाल के आरबी राय, एससी पांडे, एमपी इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन कंपनी, एसके गुप्ता सहित सामान्य वर्ग के अन्य कर्मचारियों की ओर से 2011 व इसके बाद उक्त नियम की संवैधानिकता को कठघरे में रखा गया था.


याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया एक बार सेवा में नियुक्ति के लिए आरक्षण का लाभ पाने के बाद दोबारा इसका लाभ नहीं लिया जा सकता.

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2006 में दिए गए एम नागराजू विरुद्ध केंद्र सरकार के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया गया कि कुछ विशेष परिस्थितियों में पदोन्नति में आरक्षण दिया जा सकता है. लेकिन इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन शर्तें पूरी करने का प्रावधान किया है.

जिसके अनुसार पिछड़ेपन की सीमा का निर्धारण राज्य सरकार को कराना चाहिए, कर्मचारियों ने सेवा में कितनी उम्र बिताई है और कितने कर्मचारियों की कमी है, इसका निर्धारण किया जाना चाहिए तथा प्रशासनिक दक्षता पर इस प्रकार के आरक्षण का प्रभाव न पड़े.

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