जम्मू-कश्मीर में किसकी सरकार?

जम्मू/श्रीनगर | एजेंसी: जम्मू-कश्मीर में किसकी सरकार बनेगी इस पर अभी तक धुंध छाया हुआ है. अभी तक पीडीपी, भाजपा तथा नेकां ने अंतिम रूप से तय नहीं किया है कि कौन किसे समर्थन देगा. न ही किस पार्टी का मुख्यमंत्री होगा इसके साफ संकेत मिल रहें हैं. तीनों पार्टियों के अपने-अपने दावे हैं तथा अपनी-अपनी रणनीति है. बहरहाल, जम्मू एवं कश्मीर में त्रिशंकु विधानसभा के मद्देनजर राज्यपाल एन.एन. वोहरा ने राज्य में सरकार के गठन पर चर्चा के लिए शुक्रवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी तथा भारतीय जनता पार्टी को आमंत्रित किया. पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि नेशनल कांफ्रेंस ने राज्य में सरकार गठन के लिए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी को समर्थन देने की पेशकश की है, लेकिन इस बारे में कोई लिखित वादा नहीं किया है.

राजभवन के सूत्रों ने कहा कि वोहरा ने सरकार गठन को लेकर चर्चा और संभावनाओं की तलाश के लिए पीडीपी व भाजपा दोनों को अलग-अलग पत्र लिखा है.


राजभवन ने सरकार के गठन के लिए दो पार्टियों को बुलाकर एक मिसाल पेश की है. चूंकि पीडीपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर आई है, इसलिए राज्यपाल को केवल उसे ही आमंत्रित करना चाहिए, लेकिन राजभवन के सूत्रों ने कहा कि भाजपा ने दावा किया है कि उसे सात निर्दलीय में से छह का समर्थन हासिल है, इसलिए राज्यपाल ने दोनों ही पार्टियों को बुलाना आवश्यक समझा है.

विधानसभा चुनाव में 25 सीटें जीतकर भाजपा दूसरे स्थान पर है. नेशनल कांफ्रेंस की 15, कांग्रेस की 12 सीटें हैं. निर्दलीय विधायकों की संख्या सात है.

राजभवन द्वारा पत्र प्रेषित करने के साथ ही संभावना है कि आने वाले समय में सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी.

उधर, उमर अब्दुल्ला ने कहा, “लगता है कि पीडीपी एनसी के समर्थन का एक पत्र लीक करके भाजपा के साथ कोई खिचड़ी पका रही है, जबकि ऐसा कोई पत्र है ही नहीं.” उमर ने ट्वीट में लिखा है, “सिर्फ मौखिक रूप से समर्थन की पेशकश की गई है.”

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब उन खबरों को लेकर एनसी में एक मामूली विद्रोह की स्थिति पैदा हो गई है, जिसमें कहा गया है कि एनसी भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश में लगी हुई है.

एनसी के प्रवक्ता जुनैद अजीम मट्ट ने कहा कि उनकी पार्टी ने उमर की तरफ से तीन दिन पहले दिए गए एक बयान के जरिए पीडीपी को समर्थन दिया है.

उन्होंने कहा, “प्रस्ताव की पुष्टि के लिए किसी लिखित पत्र की आवश्यकता नहीं है.”

मट्ट ने आगे कहा, “उमर साहिब की ओर से दिया गया बयान काफी है और अब पीडीपी के ऊपर निर्भर करता है कि वह इस प्रस्ताव को स्वीकारे या खारिज कर दे.”

87 सदस्यीय विधानसभा में स्पष्ट बहुमत के लिए कम से कम 44 सीटें जरूरी हैं.

उल्लेखनीय है कि निवर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 16 जनवरी को खत्म होने जा रहा है.

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