संगठन के लिये जयंती नटराजन का इस्तीफा

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: कांग्रेस नेत्री जयंती नटराजन ने संगठन में काम करने के लिये मंत्री पद से इस्ताफा दे दिया है. तमिलनाडु से राज्यसभा सदस्य जयंती नटराजन राज्यसभा की सदस्य हैं. राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है.

जयंती नटराजन से वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का लेकर वीरप्पा मोइली को दे दिया गया है. राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति के अनुसार, “राष्ट्रपति ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री एम.वीरप्पा मोइली को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देने का निर्देश दिया है.”


चार राज्यों में कांग्रस को मिली पराजय के बाद से पार्टी संगठन में फेरबदल किया जा रहा है. इसी कड़ी के चलते जयंती नटराजन को संगठन का काम दिया जा रहा है. सूत्रो के अनुसार उन्हें पार्टी के घोषणा पत्र काम दिया जा सकता है. इससे पहले कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ तथा दिल्ली की हार के बाद वहां के अध्यक्ष को बदला था. छत्तीसगढ़ का अध्यक्ष भूपेश बघेल तथा दिल्ली का अध्यक्ष लवली सिंह को बनाया गया है. इस बात के पूरे आसार है कि मध्यप्रदेश तथा राजस्थान के कांग्रेस अध्यक्षो को भी बदला जा सकता है.

चार विधानसभा में मिली पराजय से कांग्रेस नेतृत्व को इतना तो समझ में आ गया है कि सब कुछ ठीक से नही चल रहा है. इसीलिये सबसे पहले पार्टी संगठन में बदलाव लाया जा रहा है. शुक्रवार को कांगेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि जो संगठन में काम करना चाह रहें हैं वे मंत्री पद का मोह छोड़कर आ जाये. जयंती नटराजन के इस्तीफे को इसी नजरिये से देखा जा रहा है.

जयंती नटराजन

जयंती नटराजन का जन्म तमिलनाडु में एक मुदालियर परिवार में हुआ था. उनके दादा एम.बक्थवत्सलम एक प्रमुख कांग्रेसी नेता थे और 1963 से 1967 के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे. जयंती नटराजन ने कानून का अध्ययन किया और मद्रास में अपनी वकालत करने लगीं थी. अपने क़ानूनी अभ्यास के अतिरिक्त वे अखिल भारतीय महिला सम्मेलन और कानूनी सहायता बोर्ड जैसे कई सामाजिक संगठनों के लिए निःस्वार्थ काम भी करती रही हैं.

उनका राजनीतिक करियर, 1980 के दशक में राजीव गांधी की उन पर नजर पड़ने के साथ शुरू हुआ था. वे पहली बार 1986 में राज्यसभा के लिए चुनी गईं और 1992 में फिर से चुनकर आईं. 90 के दशक में जयंती नटराजन और तमिलनाडु के अन्य नेता जो नरसिम्हा राव से नाखुश थे, उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय किया था. उन्होंने जी के मूपनार के नेतृत्व तमिल मानिला कांग्रेस की स्थापना की. जयंती नटराजन ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया और 1997 में टीएमसी सदस्य के रूप में दोबारा चुनी गईं थी.

टीएमसी तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कषगम के साथ जुड़ी थी और केंद्र में संयुक्त मोर्चा सरकार का हिस्सा थी. जयंती नटराजन को 1997 में कोयला, नागरिक उड्डयन और संसदीय कार्यों का राज्य मंत्री नियुक्त किया गया. उनका बेटा एक पेशेवर वकील है.मूपनार की मृत्यु के बाद टीएमसी के नेताओं ने कांग्रेस के साथ मिलने का निर्णय लिया. जयंती नटराजन पर सोनिया गांधी की नजर पड़ी और उन्हें पार्टी की प्रवक्ता नियुक्त कर दिया गया था.

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