बिहार में मांझी की नाव डूबी

पटना | संवाददाता: बिहार में मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने के बाद मांझी ने कहा कि मुझे विधानसभा अध्यक्ष के आचरण पर भरोसा नहीं था. मुझे डर था कि विधानसभा में कुछ अनहोनी हो सकती है. हमारे समर्थक विधायकों को बैठने नहीं दिया जा सकता है.

विश्वास मत हासिल करने से ऐन पहले इस्तीफा देने वाले मांझी ने नीतीश कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाये. हालांकि उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही बनाया था.

मांझी के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुये नीतिश कुमार ने कहा कि यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था. सरकार बनाने के लिए जोड़तोड़ की पूरी कोशिश की गई. इसमें सफलता न मिलने पर मुख्यमंत्री ने इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया. भाजपा का गेम प्लान एक्सपोज़ हो गया.

हालांकि भाजपा इससे इंकार करती नज़र आई. भाजपा विधायक दल के नेता नंदकिशोर यादव ने कहा कि कौरवों ने अभिमन्यु का वध कर दिया है. उन्होंने कहा कि मांझी के इस्तीफे से जदयू, राजद और कांग्रेस का दलित विरोधी चेहरा उजागर हुआ है. भाजपा ने एक गरीब और महादलित समाज से आने वाले व्यक्ति के साथ खड़े होने का फैसला किया था.

गौरतलब है कि 10 महीने पहले लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया था और अपने सहयोगी जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था. इसके बाद पिछले महीने नीतीश कुमार ने मांझी की गतिविधियों ने नाराज हो कर जब उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिये कहा तो मांझी ने बगावत कर दी. भाजपा नेताओं से मुलाकात के बाद जीतन राम मांझी ने नीतीश और पार्टी अध्यक्ष शरद यादव पर ही हमला बोल दिया. इसके बाद जनता दल यूनाइटेड ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था.

मांझी और उनके समर्थक मामले को अदालत तक ले कर गये और आज उन्हें विश्वास मत हासिल करना था. लेकिन विधानसभा में गड़बड़ाये गणित के बाद मांझी को समझ में आ गया कि वे हारने वाले हैं तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया.

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