जोगी की जाति की जांच कंगाले कमेटी करेगी

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति की जांच फिर से रीना बाबा साहेब कंगाले कमेटी ही करेगी. आईएएस रीना बाबा साहेब कंगाले की कमेटी ने ही पिछली बार भी जाति की जांच की थी. इस रिपोर्ट में कंगाले ने अजीत जोगी को आदिवासी नहीं माना था. लेकिन उस जांच रिपोर्ट को हाईकोर्ट ने तकनीकि आधार पर खारिज कर दिया था.

अब राज्य सरकार ने एक बार फिर रीना बाबा साहेब कंगाले की अध्यक्षता में ही 6 सदस्यीय कमेटी बना कर जांच कराने का निर्णय लिया है. इस कमेटी में कुल 6 सदस्य शामिल हो सकते हैं. पिछली बार रीना बाबा साहेब कंगाले ने ही दूसरे सदस्यों की जगह खुद को ही प्रस्तुत कर के जांच रिपोर्ट में हस्ताक्षर किये थे, जिसे लेकर आपत्ति की गई थी.


उल्लेखनीय है कि पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष बनवारी लाल अग्रवाल ने 11 जुलाई, 2002 को अजीत जोगी के विरुद्ध फर्जी जाति प्रमाण पत्र लेने का आरोप लगाते हुये जनहित याचिका दायर की थी. उस समय इस मामले में तत्कालीन न्यायमूर्ति पी.सी. नायक और न्यायमूर्ति फखरूद्दीन की अदालत ने अपने आदेश में इसकी सुनवाई से बिना कोई कारण बताए इनकार कर दिया था.

लगभग 10 साल बाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुनील कुमार सिन्हा ने पूर्व में अजीत जोगी का वकील होने का हवाला देते हुये अजीत जोगी के जाति प्रमाण पत्र की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था.

इससे पहले 13 अक्टूबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को आदेश दिया था कि वह अजीत जोगी की जाति के पूरे मामले की हाई पावर कमेटी से जांच कराये. अदालत ने कहा था कि अजीत जोगी की जाति पर निर्णय राज्य-स्तरीय छानबीन समिति सर्वोच्च न्यायालय द्वारा माधुरी पाटिल प्रकरण में निर्धारित विधि के अनुसार करेगी और अपनी रिपोर्ट 3 महीने के अन्दर उसे सौपेगी. इसके बाद अजीत जोगी ने अदालत के इस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी. मामला अदालत की कार्रवाइयों में उलझा रहा.

इस बीच पिछले साल जून में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने अजीत जोगी के जाति संबंधी दावे खारिज कर दिया. रीना बाबा साहेब कंगाले की कमेटी ने जोगी के आदिवासी होने संबंधी दस्तावेज़ों को उचित और पर्याप्त नहीं माना. इसी रिपोर्ट को आधार बना कर बिलासपुर ज़िला प्रशासन ने अजीत जोगी के आदिवासी होने संबंधी प्रमाण पत्र को भी खारिज कर दिया. लेकिन जब मामला हाईकोर्ट में पहुंचा तो हाईकोर्ट ने तकनीकि आधार पर रीना बाबा साहेब कंगाले की रिपोर्ट को खारिज कर दिया. इसके बाद से ही नई कमेटी द्वारा जांच कराये जाने की अटकलें चल रही थीं.

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