विधानसभा में गूंजा बस्तर के पत्रकारों का मुद्दा

रायपुर | संवाददाता: बस्तर में पत्रकारों की गिरफ्तारी का मामला आज विधानसभा में गूंजा. विपक्षी दल कांग्रेस ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में पत्रकारों की गिरफ्तारी के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव दिया गया था.

कांग्रेस के मोहन मरकाम और सत्यनारायण शर्मा ने प्रश्नकाल शुरू होते ही यह मामला उठाया. कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि बस्तर में कानून व्यवस्था की स्थिति नहीं रह गई है. लगातार पत्रकारों की गिरफ्तारी की घटनाएं चिंताजनक है. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि स्थगन प्राप्त हुआ है. प्रश्नकाल के बाद विचार करेंगे.

प्रश्नकाल के बाद प्रभारी गृहमंत्री अजय चंद्राकर ने पूरे मामले पर सफाई पेश की लेकिन विपक्ष उनकी सफाई से संतुष्ट नहीं हुआ.

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह दंतेवाड़ा के पत्रकार प्रभात सिंह और उसके बाद दीपक जायसवाल नामक पत्रकार को गिरफ्तार किया गया है. बस्तर में किसी पत्रकार की यह चौथी गिरफ्तारी है. पिछले साल जुलाई में एक अख़बार के प्रतिनिधि सोमारु नाग को और अक्टूबर में पत्रकार संतोष यादव को माओवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था और दोनों पत्रकार तब से जेल में हैं.

प्रदेश में सूखा प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं मिलने का मामला सदन में गूंजा.कांग्रेस के गिरवर जंघेल ने प्रश्नकाल में यह मामला उठाया .
इस पर राजस्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय ने कहा कि आरबीसी में संशोधन कर किसान को इकाई माना गया है. मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया.

नया रायपुर क्षेत्र के 41 गांवों को नगरीय क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद भी वहां ग्राम पंचायत कार्यरत होने का मामला भी प्रश्नकाल में जोरशोर से उठा. कांग्रेस सदस्य धनेन्द्र साहू ने मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रभावित किसानों को नए भूअर्जन कानून के लाभ से वंचित किया जा रहा है.

राजस्व मंत्री ने कहा कि सरकार कानून का पूरी तरह पालन कर रही है. किसानों को नए अधिनियम के तहत जो लाभ मिलना है मिलेगा. पुरानी पुनर्वास नीति भी लागू है. भू अर्जन पर अधिकतम मुआवजा राशि दी जाएगी. किसी भी सूरत में कम मुआवजा नहीं दिया जाएगा. मंत्री के जवाब से असन्तुष्ट होकर कांग्रेस सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया.


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