छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 10 जज कम

नई दिल्ली | संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अभी भी जजों की कमी बनी हुई है. जजों की कमी से जूझ रहे छत्तीसगढ़ में हजारों की संख्या में मामले लंबित हैं. साल दर साल यह मामले कम होने थे लेकिन जजों की कमी के कारण मामले टलते जा रहे हैं. लेकिन ये हालात पूरे देश में एक जैसे हैं. देश में सिक्किम अकेला राज्य है, जहां जजों का कोई पद खाली नहीं है. सिक्किम उच्च न्यायालय में दो पद हैं, जहां दो जज नियुक्त हैं.

शुक्रवार को श्रीमती कानीमोझी के सवाल के जवाब में विधि और न्याय तथा कारपोरेट कार्य राज्य मंत्री पी.पी.चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जजों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 22 है लेकिन आज भी यहां केवल 12 जज ही कार्यरत हैं. उन्होंने देश के दूसरे राज्यों में भी जजों की कमी का हवाला देते हुये कहा कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में रिक्तियों का भरा जाना, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच एक सतत् और सहयोगकारी प्रक्रिया है इसके लिए विभिन्न संवैधानिक प्राधिकारियों से परामर्श और अनुमोदन अपेक्षित है.


मंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव का आरंभ भारत के मुख्य न्यायमूर्ति में निहित है, जबकि उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रस्तावों का आरंभ संबद्ध उच्च न्यायालय के मुख्यन्यायमूर्ति में निहित है. विद्यमान रिक्तियों को शीघ्रता से भरने के लिए प्रत्येक प्रयास किया जाता है. उच्च न्यायालयों में रिक्तियां न्यायाधीशों की सेवानिवृति, त्यागपत्र या उन्नयन के कारण बढ़ती रहती है. श्री चौधरी ने कहा कि 30 जून 2014 में न्यायाधीशों की संख्या 906 थी, जो आज बढकर 1079 हो गई है.

हालांकि मंत्री ने अपने उत्तर में स्वीकार किया कि 1079 पदों की मंजूरी के बाद भी आज की तारीख में केवल 673 पदों पर ही जजों की नियुक्ति हो सकी है. 406 पद अभी भी खाली हैं. हालत ये है कि देश की राजधानी दिल्ली में 60 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 38 पद भरे हुये हैं. गुजरात में 52 में से 22 पद खाली हैं.

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