जंक फूड बच्चों के लिये खतरनाक: रिपोर्ट

नई दिल्ली | संवाददाता: जंक फूड से बच्चों में मोटापा, डायबिटीज तथा उच्च रक्तचाप की बीमारी बढ़ रही है. इसलिये उन्हें स्कूलों के कैंटीनों तथा स्कूलों के 200 मीटर के दायरे में बेचने पर रोक लगा दी जाये. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा गठित “जंक फूड और बचपन का मोटापा” समिति ने यह अनुशंसा की है. उल्लेखनीय है कि स्कूली बच्चों में बढ़ते मोटापा तथा अन्य बीमारियों पर केन्द्र सरकार के मंत्रालय ने इस समिति का गठन किया था. जिसने इसी सप्ताह अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को सौंपी है.

समिति ने बच्चों में बढ़ रहे मोटापा पर चिंता व्यक्त की है तथा कहा है कि इससे बच्चों में डायबिटीज तथा उच्च रक्तचाप की बीमारी बढ़ रही है.

गौरतलब है कि ‘सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट’ ने वर्ष 2012 में जांच करके पाया था कि पिज्जा, बर्गर, सॉफ्ट ड्रिंक, चिप्स तथा इंस्टेंट नूडल्स में नमक, शक्कर तथा वसा उच्च मात्रा में पाया जाता है. ‘सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरमेंट’ ने वर्ष 2014 में स्कूली बच्चों को इन जंक फूड से दूर रखने के लिये अपने सुझाव भी दिये थे.

दुनिया के कई देशों में स्कूली बच्चों को इन जंक फूड से दूर रखने के लिये कड़े नियम तता कानून बनाये गये हैं.

एक विदेशी कंपनी के सर्वे के मुताबिक भारत में जंक फूड तथा फास्ट फूड का बाजार 18 फीसदी की दर से प्रति वर्ष बढ़ रहा है. सर्वे में बताया गया है कि वर्ष 2020 तक भारत में फास्ट फूड का बाजार 27.57 बिलियन अमरीकी डालर का हो जायेगा. सर्वे में कहा हया है कि भारतीय बाजार में फास्ट फूड का संगठित बाजार अर्थात् डोमिनो पिज्जा, पिज्जा हट, कैंटकी फ्राइड चिकन जैसे श्रृंखला के पास्ट फूड समूह 27 फीसदी की दर से प्रति साल वृद्धि करेगी.

कई चिकित्सीय अध्ययनों में पाया गया है कि भारत में 4 से 22 फीसदी बच्चों में मोटापे की बीमारी है.

मोटापे से होने वाली बीमारियां-
डायबिटीज
उच्च रक्तचाप
रक्त में वसा की उच्च मात्रा
हृदय रोग
स्ट्रोक
नींद एवं सांस की बीमारियां

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