पत्रकार कमल शुक्ला पर देशद्रोह का मामला दर्ज

रायपुर | संवाददाताः बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किये जाने की पत्रकारों ने कड़ी निंदा की है. इधर मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल ने भी एक बयान में कहा कि इस तरह से मामला दर्ज कर पत्रकारों को डराने की कोशिश की जा रही है.

गौरतलब है कि कमल शुक्ला पर जस्टिस लोया के मामले में कथित रुप से एक अपमानजनक कार्टून फेसबुक पर शेयर करने का आरोप है. हालांकि फेसबुक ने वह कार्टून हटा लिया है. लेकिन इसके बाद राजस्थान के एक व्यक्ति की कथित शिकायत पर पुलिस ने कमल शुक्ला के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कर लिया है.


इधर इस मामले में राज्य के गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा ने कहा है कि कानून अपना काम कर रहा है. उसके लिये सभी लोग बराबर हैं.

मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल ने कहा है कि केदारनाथ सिंह से लेकर असीम त्रिवेदी तक के मुकद्दमों में बार बार दोहराया गया है कि राजनैतिक आलोचना, वोह चाहे कितनी ही तीखी क्यों न हो, बिना हिंसक गतिविधियों के साथ सम्बन्ध के, राष्ट्रद्रोह नहीं कहला सकता है. कमल शुक्ल लगातार बस्तर से अपनी निडर और तथ्यपरक ज़मीनी रिपोर्टों के कारण छत्तीसगढ़ सरकार की आँख की किरकिरी बने रहे हैं.

पीयूसीएल के बयान में कहा गया है कि कमल शुक्ला ने “पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति” के एक महत्वपूर्ण नेता के रूप में, छत्तीसगढ़ के पत्रकारों की सुरक्षा के अभियान में, और उनके लिए एक कानून का मसौदा बनाने की प्रक्रिया में भी अहम् भूमिका निभाई है. छत्तीसगढ़ पी.यू.सी.एल. को इसमें कोई संदेह नहीं है कि वर्तमान प्रकरण श्री शुक्ल को मात्र प्रताड़ित करने के लिए दर्ज किया गया है. विशेष रूप में ऐसी स्थिति में जब महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में, तथा बीजापुर और सुकमा में, कई संदेहास्पद मुठभेड़ों में आदिवासियों और माओवादी कार्यकर्ताओं की मौतों की घटना हुई है.

पीयूसीएल ने कहा है कि पत्रकारों के बीच में भी यह कार्रवाही एक चिल्लिंग इफ़ेक्ट- एक भय का वातावरण पैदा करने की कोशिश है, ताकि वे ज़मीनी सच्चाइयों की रिपोर्टिंग न करें. छत्तीसगढ़ पी.यू.सी.एल. इसकी तीव्र निंदा करती हैं और मांग करती है कि इस मुकद्दमे को तुरंत वापस लिया जाये.

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