केदारनाथ सिंह का निधन

नई दिल्ली | संवाददाता: हिंदी के शीर्ष कवि केदारनाथ सिंह नहीं रहे. सोमवार को दिल्ली के एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली. 86 साल के केदारनाथ सिंह पिछले कुछ दिनों से यहां भर्ती थे.

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चकिया में एक जुलाई 1934 को जन्मे केदारनाथ सिंह की अभी बिल्कुल अभी, ज़मीन पक रही है, यहाँ से देखो, अकाल में सारस, उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ, बाघ, तालस्ताय और साइकिल जैसी कविता की किताबों ने अपनी खास पहचान बनाई थी. इसके अलावा उन्होंने ताना-बाना (आधुनिक भारतीय कविता से एक चयन), समकालीन रूसी कविताएँ, कविता दशक, साखी (अनियतकालिक पत्रिका), शब्द (अनियतकालिक पत्रिका) का भी संपादन किया था.


इसके अलावा कल्पना और छायावाद, आधुनिक हिंदी कविता में बिंबविधान, मेरे समय के शब्द, मेरे साक्षात्कार जैसी समालोचना की किताबें भी उन्होंने लिखी थीं.

केदारनाथ सिंह हिंदी कविता में नए बिंबों के प्रयोग के लिए जाने जाते थे. उन्होंने अपनी कविताओं में सौंदर्य का एक नया स्वरुप गढ़ा था. केदारनाथ सिंह अज्ञेय द्वारा सम्पादित तीसरा सप्तक के कवि भी थे. उनकी कई कविताओं का अनुवाद अंग्रेजी, स्पेनिश, रूसी, जर्मन और हंगेरियन में भी हुआ था.

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित केदारनाथ सिंह को कविता संग्रह “अकाल में सारस” के लिये साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था. उन्हें मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार, कुमार आशान पुरस्कार (केरल), दिनकर पुरस्कार, जीवनभारती सम्मान (उड़ीसा) और व्यास सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार मिले थे. उन्होंने अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता के कारण दिल्ली की हिंदी अकादमी का दो लाख का सर्वोच्च शलाका सम्मान ठुकरा दिया था.

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