कोरबा के इस गांव की चौपाल ही है थाना

कोरबा | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित फूलझर एक ऐसा भी गांव है जहां विगत 107 साल से किसी भी प्रकार का झगड़ा-विवाद या चोरी-डकैती नहीं हुई है. जिला मुख्यालय कोरबा से 60 किलोमीटर दूरी पर स्थित फूलझर गांव का एक भी मामला अभी तक थाने में नहीं पहुंचा है. कोई विवाद होता भी है तो निपटारा गांव की चौपाल पर हो जाता है. इसे आदर्श गांव माना गया है.

फूलझर देश के अन्य स्थानों से इसलिए अलग है कि 1907 के बाद से इस गांव में न मारपीट हुई और न ही चोरी हुई. यहां की चौपाल ही थाना और न्याय का मंदिर है. यहां पंच परमेश्वर ही फैसले कर विवाद सुलझा लेते हैं. यही वजह है कि फूलझर को अपराध विहीन आदर्श गांव घोषित होने पर मुख्यमंत्री ने पुरस्कृत किया है.


सूबे के लिए मिसाल बने फूलझर गांव के पटेल रामलाल (75) का कहना है कि उन्हें एक भी ऐसी घटना याद नहीं है, जिसमें कोई मामला थाने तक पहुंचा हो. वह युवा अवस्था से ही गांव के मुखिया हैं. उन्होंने बताया कि यहां भी छोटे-मोटे विवाद होते हैं, लेकिन इनका निपटारा गांव की चौपाल पर कर लिया जाता है.

उन्होंने कहा कि पंच परमेश्वर का फैसला सभी मानते हैं. यहां का हर जवान सिपाही है और उन पर ही गांव व यहां की बहू-बेटियों की सुरक्षा का दारोमदार है. यहां के थाने में रोजनामचे तो हैं, लेकिन आज तक गांव के एक भी व्यक्ति का नाम उनमें दर्ज नहीं है.

कोरबा के पुलिस अधीक्षक रतनलाल डांगी कहते हैं कि फूलझर एक आदर्श गांव है, जिसे अपराध शून्य होने की वजह से पुरस्कार से नवाजा गया है. इससे अन्य गांवों के ग्रामीणों को भी सीख लेनी चाहिए. अगर सूबे में सभी गांव ऐसे ही हो जाएं तो छत्तीसगढ़ को अपराधमुक्त राज्य बनने से कोई रोक नहीं सकता.

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