कोरिया वनमंडल में ठेंगे पर आरटीआई

बैकुंठपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कोरिया वनमंडल में सूचना का अधिकार कानून ठेंगे पर है. अधिकारी मनमाने तरीके से सूचना के अधिकार कानून की व्याख्या कर रहे हैं और जानकारियों को छुपाने का काम कर रहे हैं. हालत ये है कि सूचना मांगने वाले को हतोत्साहित करने के लिये आवेदक को अपील का रास्ता दिखाया जा रहा है.

बिलासपुर के एक सूचनादाता ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से 2000 से मार्च 2013 तक वन अपराध की वनमंडलवार व परिक्षेत्रवार जानकारी चाही थी. इसके अलावा वन अपराध की न्यायलयीन प्रकरणों की जानकारी और वर्तमान स्थिति की जानकारी चाही थी. इसके जवाब में दुर्ग, अंबिकापुर समेत कई वन मंडलाधिकारियों ने आवेदक को जानकारी उपलब्ध करा दी या प्रक्रिया शुरु कर दी. लेकिन वन मंडलाधिकारी, कोरिया ने दिलचस्प जवाब देते हुये आवेदक के आदेवन को ही खारिज कर दिया.

8 अप्रैल के अपने पत्र में जनसूचना अधिकारी, कोरिया वनमंडल, बैकुंठपुर ने आवेदक को सूचना दी है कि आपके द्वारा चाही गई जानकारी अस्पष्ट एवं अपूर्ण है. सूचना के अधिकार की धारा 2 (एफ) व 6 (1) (बी) के तहत काल्पनिक प्रश्न की श्रेणी में आते हैं. अतः आपका आवेदन निरस्त किया जाता है.

जिस प्रश्न को राज्य के वन संरक्षक ने स्पष्ट मानते हुये आवेदन को अधिनस्थ कार्यालयों को भेजा है और दूसरे सूचना अधिकारियों ने जवाब भी दिया है, उसी आवेदन को जनसूचना अधिकारी, कोरिया वनमंडल, बैकुंठपुर ने काल्पनिक बताने का हास्यास्पद जवाब दे कर सूचना के अधिकार कानून को ठेंगा दिखा दिया है.

जनसूचना अधिकारी, कोरिया वनमंडल, बैकुंठपुर के लिये यह पहला अवसर नहीं है. इसी तरह का एक अन्य आवेदन वन डीपो से होने वाली आय की वर्षवार और प्रजातिवार जानकारी का था. इस आवेदन पर राज्य के दूसरे वनमंडल अधिकारियों ने सूचना मांगने वाले को जानकारी मुहैय्या करा दी या उसकी प्रक्रिया शुरु कर दी लेकिन कोरिया वनमंडल, बैकुंठपुर के जन सूचना अधिकारी ने इस आवेदन को भी यह कहते हुये निरस्त कर दिया कि प्रश्न स्पष्ट नहीं है.

छत्तीसगढ़ में आरटीआई को लेकर लंबे समय से सक्रिय विनोद व्यास का कहना है कि कई बार जन सूचना अधिकारी के पद पर ऐसे लोगों को बैठा दिया जाता है, जो कम बुद्धि के होते हैं या फिर आदतन जनता को हतोत्साहित करने वाले आपराधिक प्रवृत्ति के होते हैं. जन सूचना आयुक्त को ऐसे मामले में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिये. विनोद व्यास ने कोरिया के वनमंडलाधिकारी के जवाब को गैरकानूनी बताते हुये उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है.

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