उत्पीड़न से बचाने वाली, स्वंय उत्पीड़ित

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: मध्य प्रदेश में महिला जज ने हाई कोर्ट के जज पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है. आरोप अपने आप में संगीन तथा चौका देने वाला है. महिला जज ने आरोप लगाया है कि हाई कोर्ट के जज ने उसे अपने घर में एक समारोह में आइटम सांग पर डांस करने के लिये कहा था. वहीं, हाई कोर्ट के जज का कहना है कि यदि आरोप सच निकले तो मै फांसी पर चढ़ने के लिये तैयार हूं. उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया है.

सर्वोच्य न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने कहा है कि वह मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रिपोर्ट का इंतजार कर रहें हैं. पीड़ित जज ने उत्पीड़न से बाज आकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. महिला जज का आरोप है कि उसे हाई कोर्ट के जज ने उसके बाद भी अपने बंगले पर बुलाया था परन्तु वह वहां नहीं गई थी. बाद में महिला जज अपने पति के साथ हाई कोर्ट के जज के घर गई थी जिससे हाई कोर्ट का जज नाराज हो गया था.


महिला जज का आरोप है कि हाई कोर्ट के जज की बात न मानने पर उसका स्थानांतरण कर दिया गया है जबकि उसकी लड़की अभी 12वीं में पढ़ती है. इस कारण से महिला जज ने 8 माह तक अपने स्थानांतरण को रोकने की गुहार की थी जिसे नहीं माना गया. आखिर में तंग आकर उसने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

गौरतलब है कि महिला जज अपने जिले की विशाखा समिति की अध्यक्ष है जिसे सर्वोच्य न्यायालय के एक निर्णय के अनुसार महिलाओं पर कार्य स्थल में होने वाले यौन उत्पीड़न से बचाने के लिये गठित किया जाता है. उल्लेखनीय है कि जिस महिला जज पर जिले के अन्य महिलाओं को कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न से बचाना था उसी ने हाई कोर्ट के जज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है.

इसी से समझा जा सकता है कि हमारे देश में कानूनों की धज्जियां उसके रक्षक ही उड़ाते हैं तथा हमारा देश आज भी महिलाओं को मनोरंजन का साधन मात्र मानता है. मामला इसलिये गंभीर है कि जब एक महिला जज के साथ यौन उत्पीड़न हो सकता है तो आफिसों में काम करने वाली दूसरी महिलाएं किस तरह से अपनी रक्षा कर पाती होगीं.

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