आडवाणी के ब्लॉग में महाभारत

नई दिल्ली | संवाददाता :अपनी बीमारी का हवाला देकर गोवा नहीं पहुंचने वाले भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी अपना दुख अपने ब्लॉग में व्यक्त कर रहे थे. जिस समय नरेंद्र मोदी के अवतार को गोवा में तामझाम के साथ पेश किया जा रहा था, उसी समय आडवाणी का यह ब्लाग आनलाइन हुआ है. आडवाणी ने अपने ताजा ब्लॉग में इशारों ही इशारों में अपनी पीड़ा व्यक्त कर दिया है. अपने ब्लॉग में आडवाणी ने कई बातें ऐसी लिखी हैं, जिससे अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है.

आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि पृथ्वीराज रोड स्थित हमारे घर में श्रीकृष्ण की चंदन की एक बेमिसाल मूर्ति है. इसमें श्रीकृष्ण कुरुक्षेत्र में अर्जुन को अपने विश्वरूप का दर्शन देते हुए गीता का ज्ञान दे रहे हैं. चिकमंगलूर, कर्नाटक के कलाकार द्वारा बनाई गई इस मूर्ति की नक्काशी की खास बात यह है कि इस मूर्ति के पिछले हिस्से में महाभारत के कई प्रसंगों जैसे द्रौपदी चीरहरण, बाणों की शैया पर लेटे भीष्म पितामह, पांडवों को उपदेश का जिक्र है. इसके अलावा दशावतारों का भी जिक्र है.

कमल हासन की फिल्म ‘विश्वरूपम’ की तारीफ करते हुये आडवाणी ने लिखा है कि पिछले दिनों मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला कि तमिलनाडु के बेहतरीन फिल्ममेकर कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम पर विवाद हो रहा है. तमिलनाडु सरकार ने उसे बैन किया और बाद में कुछ दृश्यों को संपादित करने के बाद फिल्म से बैन हटा दिया गया. इसके बाद से फिल्म को देखने की इच्छा थी. पिछले दिनों कमल हासन का फोन आया कि वह किसी काम से दिल्ली आ रहे हैं और एक दिन वह उन्हें अपनी फिल्म दिखाएंगे. तीन जून को परिवार और दोस्तों के साथ यह बेहतरीन फिल्म देखी. यह पिछले कुछ सालों में देखी गई मेरी बेहतरीन फिल्मों में से एक है.

आडवाणी ने आगे लिखा है कि विश्वरूपम फिल्म की रिलीज़ के बाद हमारे घर खाने पर आए कमल हासन को मैंने कराची के स्कूली दिनों में सुना चुटकुला सुनाया. दूसरे युद्ध के दौरान हिटलर और मुसोलिनी मिले. हिटलर ने मुसोलिनी से कहा, यार हमने बहुत पाप किए हैं. मौत के समय हमें इसका अंजाम भी भुगतना पड़ेगा. तब मुसोलिनी ने कहा कि जिंदगी के आखिरी दिनों में मैं वेटिकन जाऊंगा और पोप से कहूंगा कि मुझे स्वर्ग का रास्ता पार कराएं. तब हिटलर ने मुसोलिनी से कहा कि मुझे भी अपने साथ पोप के पास ले चलना मैं भी साथ चलूंगा. कहानी आगे बढ़ती है और दोनों पोप से मिलने के लिए निकल पड़ते हैं….. हालांकि आडवाणी ने पूरी कहानी का जिक्र तो यहां नहीं किया, लेकिन कहानी में कागज़ के टुकड़ों और कैंचियों का जिक्र किया गया है…. इसके बाद कहानी आगे बढ़ती है और तीनों स्वर्ग के रास्ते पर निकल पड़ते हैं. लेकिन हिटलर, मुसोलिनी अंततः नरक में गिर जाते हैं और सिर्फ पोप ही स्वर्ग पहुंचते हैं.

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