लॉ इंटर्न ने आरोपों की दुबारा पुष्टि की

कोलकाता | समाचार डेस्क: पीड़िता ने आरोपी जस्टिस गांगुली के खिलाफ आरोपों की दुबारा पुष्टि की है. उन्होंने अपने ब्लाग के माध्यम से कहा है कि ‘जो लोग गलत अफवाह उड़ा रहे हैं,मामले को राजनीतिक रंग दे रहे हैं वो ऎसा पूर्वाग्रह और दुर्भावना की वजह से कर रहे हैं ताकि मामले पर पर्दा डाला जा सके और वो जांच और जिम्मेदारी से बच सकें.’ पीड़िता ने आगे लिखा है कि ‘मुझे बताया गया कि बस एक ही रास्ता है और वो है पुलिस में शिकायत दर्ज करना और वो मैं नहीं चाहती थी. लेकिन फिर मुझे लगा कि मुझे दूसरी छात्राओं को आगाह करना चाहिए कि ऐसी ऊंची जगहों पर भी इस तरह की घटनाएं होती हैं. इसीलिए मैंने ब्लॉग का सहारा लिया.’

गौरतलब है कि सोमवार को आरोपी जस्टिस अरूण कुमार गांगुली ने सर्वोच्य न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र में लिखा था कि ‘घटनाक्रम को देखने से पता चलता है कि मेरी छवि ध्वस्त करने के लिए ऐसा किया गया. दुर्भाग्यवश मैंने कुछ ऐसे फैसले दिए जो शक्तिशाली लोगों के खिलाफ थे. विषम परिस्थितियों के बावजूद मैंने बिना भय के फैसले दिए. उन्होंने कहा, अगर मेरे खिलाफ एक साथ हमले किए जा रहे हैं तो यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर खतरा है.’

सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश ए.के. गांगुली ने सोमवार को प्रधान न्यायाधीश पी. सतशिवम को लिखे पत्र में दावा किया है कि उनको बदनाम करने के लिए साजिश रची गई. उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय की जांच समिति की रिपोर्ट पर कई सवाल खड़े किए. समिति ने अपनी रिपोर्ट में गांगुली को ‘अशोभनीय आचरण’ का दोषी ठहराया है. गांगुली पर एक कानून की प्रशिक्षु ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है.

अपने ब्लाग में पीड़िता ने लिखा है कि ’18 नवंबर 2013 को मैं कमेटी के सामने पेश हुई और अपना मौखिक और लिखित दोनों बयान दिया. 29 नवंबर 2013 को मैंने सुप्रीम कोर्ट की कमेटी को दिए अपने बयान का हस्ताक्षर किया हुआ हलफनामा एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया इंदिरा जयसिंह को भेजा. उसमें मेरे साथ हुए यौन शोषण का ब्यौरा थाए मैंने उनसे गुजारिश की कि वो सही कार्रवाई करें. कमेटी के रिपोर्ट के बावजूद कई नामी शख्सियतें और कानून के दिग्गजों ने मुझे बदनाम करने की कोशिश की. अपनी बदनामी और सुप्रीम कोर्ट की कमेटी पर उठते सवालों के मद्देनजर मैंने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया इंदिरा जयसिंह को मेरा बयान सार्वजनिक करने को कहा. मैं ये कहना चाहती हूं कि जो भी मेरे बयान को झूठ करार दे रहा है वह न सिर्फ मेरी बेइज्जती कर रहा है बल्कि सुप्रीम कोर्ट का भी अपमान कर रहा है.’

एक तरफ पीड़िता लॉ इंटर्न जस्टिस गांगुली पर लगे आरोपो की दोबारा पुष्टि कर रही है वहीं दूसरी ओर जस्टिस गांगुली इसे षड़यंत्र करार दे रहें हैं. देखना है कि अब सर्वोच्य न्यायालय क्या कदम उठाता है.

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