शराब से प्रतिदिन 15 मौतें

शराब पीने के कारण प्रतिदिन 15 भारतीयों की मौत हो जाया करती है. उसके बावजूद हमारे देश में प्रति व्यक्ति शराब के उपभोग में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि शराब पीना एक स्वास्थ्यगत समस्या है न कि सामाजिक. यह दिगर बात है कि समाजिक आंदोलनों से शराबखोरी की प्रवृति कम होती है. देश भर में शराब बंदी पर छिड़ी बहस के बीच इंडियास्पेंड ने खुलासा किया है कि भारत में शराब पीने के प्रभावों से प्रतिदिन 15 लोगों या हर 96 मिनट में एक व्यक्ति की मौत होती है.

इंडिया स्पेंड ने यह खुलासा राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के हालिया उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर किया है.

भारत में प्रति व्यक्ति शराब के उपभोग में 38 प्रतिशत वृद्धि हुई जो 2003-05 में 1.6 से बढ़कर 2010-12 में 2.2 लीटर प्रति व्यक्ति हो गई थी .

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रपट ने भी खुलासा किया कि भारत में 11 प्रतिशत से अधिक लोग शराबी हो गए थे, जबकि अंतर्राष्ट्रीय औसत 16 प्रतिशत है.

आंकड़े बताते हैं कि शराब के खिलाफ बड़े पैमाने पर राजनीतिक समर्थन मिले. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि शराब एक स्वास्थ्य समस्या है न कि नैतिक.

तमिलनाडु में चौथी बार मुख्यमंत्री के रूप में कार्य शुरू करने के पहले दिन जे.जयललिता ने 23 मई को 500 शराब की दुकानें बंद कर दीं.

इस साल अप्रैल में बिहार में शराब के उत्पादन, बिक्री और उपभोग पर रोक लगा दी गई.

केरल में भी अगस्त, 2014 में शराब की बिक्री सिर्फ पांच तारा होटलों तक सीमित कर दी गई थी.

अंग्रेजी दैनिक ‘दी इंडियन एक्सप्रेस’ की रपट के अनुसार केरल और तमिलनाडु में चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में भी शराब निषेध को बड़े पैमाने पर समर्थन मिला था.

केरल में 43 प्रतिशत और तमिलनाडु में 52 प्रतिशत महिलाएं और पुरुष निषेध के पक्ष में थे. उनका मानना था कि शराब घरेलू हिंसा को बढ़ाती है.

हाल में हुई शराबबंदी से पहले भारत के गुजरात और नगालैंड ही ऐसे राज्य थे जहां निषेध लागू था.

एनसीआरबी के आंकड़े के अनुसार शराब के प्रभावों से सबसे अधिक मौतें महाराष्ट्र में होती हैं. मध्य प्रदेश और तमिलनाडु क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं.

तमिलनाडु के संगठन लोक शक्ति के एस. राजू ने बीबीसी से कहा, “बड़े अपराध और दुर्घटनाएं शराब के कारण होती हैं. यह डकैती और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के लिए भी जिम्मेवार है.”

उन्होंने कहा कि शराब के कारण तमिलनाडु में सबसे अधिक तीस साल से कम उम्र की विधवाएं हैं.

एक गैर सरकारी संस्था आल्कोहल एंड ड्रग इंफॉरमेशन सेंटर के हवाले से एक ब्रिटिश अखबार ‘दी इकोनॉमिस्ट’ ने कहा कि सभी अस्पतालों में एक चौथाई मरीजों की भर्ती और केरल में 69 प्रतिशत अपराध नशे के कारण होते हैं.

सन 2014 में जहरीली शराब पीने से प्रतिदिन पांच लोगों की मौत होती थी.

मालवानी और मुंबई में 2015 में अवैध शराब पीने से 100 लोगों की मौत हो गई थी.

जहरीली शराब पीने से 2014 में 1699 लोगों की मौत हो गई थी जो 2013 में 387 लोगों की हुई मौत की तुलना में 339 प्रतिशत की वृद्धि थी.

हालांकि लंदन स्कूल ऑफ हाईजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के प्रमुख लोक स्वाथ्य विशेषज्ञ विक्रम पटेल ने एक अंग्रेजी दैनिक ‘दी इंडियन एक्सप्रेस’ में छपे अपने एक लेख में इस बात पर जोर दिया था कि निषेध से शराब की लत और मौतें कम नहीं हो सकती हैं.

नोट : (2014 से शराब के कारण हुई मौत के आंकड़े नहीं दिए जाते हैं इसलिए 2013 के आंकड़ों को आधार बनाया है.)

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