नौ की कथा

कनक तिवारी
नौ से बारह का जुमला इन दिनों सब जगह तारी है. कांग्रेस के युवा उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के महाअधिवेशन में प्रधानमंत्री से मांग रखी कि सब्सिडीयुक्त रसोई गैस सिलेंडर नौ से बढ़ाकर बारह कर दिए जाएं. आनन फानन में मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दे दी.

पहले देश की अर्थव्यवस्था का रोना रोकर नौ की संख्या निर्धारित की गई थी. राहुल गांधी के कारण बचाव के सभी तर्क धरे रह गए.


छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कटाक्ष किया कि कांगेस का यह 9 से 12 का शो है. सिनेमा हॉल में वही शो अंतिम होता है. रमन सिंह ने यह नहीं बताया कि इन्हीं अंकों को लेकर एक रोमांटिक गीत का मुखड़ा कहता है ‘चलती है क्या नौ से बारह.‘

नौ की संख्या का सामाजिक जीवन में बहुअर्थी प्रयोग होता है. सत्ता से यदि कोई पार्टी बाहर हो गई तो कहा जाता है वह नौ दो ग्यारह हो गई. इसी तरह यह शुभांक और कई अर्थों में प्रयुक्त होता है. शक्ति की देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा करती रस्मअदायगी साल में दो बार नवरात्रि पर्व लेकर आती है. पूजा की शुरुआत नवग्रहों की स्थापना के बाद होती है.

कहते हैं बादशाह अकबर के दरबार के नौ रत्न भारत के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण मंत्रिगण रहे हैं. जब कोई व्यक्ति, संस्था अथवा सरकार शिथिल गति से चले तो उस पर कटाक्ष किया जाता है कि उसकी चाल तो नौ दिन चले अढ़ाई कोस जैसी है. नौ के साथ पता नहीं किस राधा के लिए जुड़ा है ‘न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी.‘ कृष्ण की राधा तो बिना तेल के मुरली की धुन पर नाचती थीं.

नौ का मौसम पर भी ऐसा कब्ज़ा है कि साल के सबसे कठिन दिन नौतपा कहलाते हैं. कान्यकुब्ज ब्राह्मणों के लिए बड़ा पुराना और मुफीद चुटकुला गढ़ा गया है ‘आठ कनोजिया और नौ चूल्हा.‘ मध्यप्रदेश में ही द्वारिकाप्रसाद मिश्र और शुक्लबंधु स्वजातीय होने के बाद भी बेतरह लड़ते झगड़ते थे.

अंकगणित में नौ सबसे बड़ी इकाई है. उसके बाद दहाई का अध्याय शुरू होता है. अब भले ही अमीरी बहुत बढ़ गई हो लेकिन एक ज़माने में और कहानियों तक में सबसे कीमती गहना नौलखा हार ही होता था. अंगरेज़ी में भी मुहावरा है ‘ए कैट हैज़ नाइन लाइव्स‘ अर्थात ‘बिल्ली के एक नही नौ जन्म होते हैं.‘

नौ में कितनी भी बार नौ जोड़ो या गुणा करो उसके अंकों का योग नौ ही होता है. इतने चमत्कारिक अंक के बराबर रसोई गैस के सिलेंडर देने वाली कांग्रेसी सरकार ने अचानक सब्सिडीयुक्त सिलेंडरों की संख्या बढ़ाकर बारह कर दी है. उसका ऐसा ख्याल होगा कि अब तो राजनीति में पौ बारह है. डॉ. रमनसिंह के कटाक्ष का अर्थ है कि कांग्रेस के ऐसा करने से उसके बारह बजेंगे अर्थात वह परास्त होगी. देखना है कि नौ का अंक बारह के मुकाबले राजनीति में क्या गुल खिलाता है.

* उसने कहा है-7

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