उपचुनाव नतीजे से गरमाएगी राजनीति

भोपाल | संदीप पौराणिक: मध्य प्रदेश में विधानसभा के उपचुनाव के नतीजों ने राजनीतिक माहौल के गर्माने के संकेत दे दिए हैं. कांग्रेस जहां तीन में से एक स्थान पर मिली जीत से उत्साहित है और भारतीय जनता पार्टी पर धन बल व बाहुबल के इस्तेमाल का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा दो स्थानों पर मिली जीत के बाद भी खुश नहीं है, उसे तो एक स्थान पर मिली हार सता रही है और पार्टी इस हार की समीक्षा की बात कर रही है.

राज्य में वर्ष 2003 के बाद से भाजपा को मुख्य चुनाव से लेकर उप चुनाव तक में जीत की आदत से पड़ गई थी मगर तीन विधानसभा क्षेत्रों विजयराघवगढ़, बहोरीबंद और आगर में हुए उप चुनाव में बहोरीबंद में मिली हार ने उसकी इस आदत को गड़बड़ा दिया है. बहोरीबंद की हार भाजपा के लिए इसलिए चिंता में डालने वाली है क्योंकि भाजपा ने चुनाव से पहले यहां के कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को दल बदल कराकर भी जीत हासिल नहीं कर पाई.

राज्य में जिन तीन विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हुए उनमें से एक विजयराघवगढ कांग्रेस के पास थी, यहां से विधायक संजय पाठक ने कांग्रेस छोड़ने के साथ विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. वहीं बहोरीबंद भाजपा विधायक प्रभात पांडे के निधन और आगर मनोहर उंटवाल के सांसद बनने से खाली हुई थी.

इस उप चुनाव को भाजपा और कांग्रेस ने पूरी ताकत से लड़ा था. भाजपा के पास जहां लोकसभा चुनाव में मिली सफलता, राज्य सरकार की विकास नीतियां और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव का आधार था, तो दूसरी ओर कांग्रेस के पास केंद्र सरकार की वादा खिलाफी और राज्य में हुए व्यावसायिक परीक्षा मंडल की परीक्षाओं में हुए घोटाले थे.

राज्य के तीन विधानसभा क्षेत्रों में से भाजपा ने आगर क्षेत्र में अपनी जीत बरकरार रखी तो विजयराघवगढ़ कांग्रेस से छीनी है वहीं कांग्रेस ने बहोरीबंद की सीट भाजपा से छीनी है. कांग्रेस इस जीत को लेकर उत्साहित है. प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव का कहना है कि विधानसभा के उपचुनावों के नतीजों ने साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राज्य सरकार से जनता का मोहभंग हो गया है. भाजपा ने जो दो सीटें जीती वह जीती नहीं बल्कि लूटी है.

दूसरी ओर भाजपा के नवनियुक्त अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान ने कहा है कि तीन स्थानों पर हुए उप चुनाव में से दो क्षेत्र भाजपा के कब्जे में थे, दो फिर जीते हैं, बहोरीबंद में भाजपा को हार मिली है, इस हार का अध्ययन व विश्लेषण किया जाएगा कि आखिर हार क्यों हुई.

राज्य में आगामी समय में नगरीय निकाय के चुनाव होने वाले हैं, इस लिहाज से इन विधानसभा के उप चुनाव काफी अहम हैं, क्योंकि कांग्रेस व भाजपा के लिए चुनौती भरे होंगे. भाजपा के लिए जनता को बताना होगा कि व्यापमं घोटाले में उसने क्या किया, बिजली की स्थिति कब सुधरेगी, वहीं कांग्रेस गड़बड़ियों को मुद्दा बनाने में पीछे नहीं रहेगी. यही कारण है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल गर्माने के पूरे आसार हैं.


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