पानी में डूबेंगे पन्ना के वन्य प्राणी

भोपाल | समाचार डेस्क: केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना के कारण पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के 32 बाध, हजारों वन्य प्राणी तथा वहां रहने वाले परिवार डूबान के क्षेत्र में आ जायेंगे. केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना के निर्माण के पहले चरण पर मध्य प्रदेश के वन्य प्राणी बोर्ड ने कुछ शर्तो के साथ सहमति जता दी है. इस कारण पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के बाघों और रहवासियों पर संकट के आसार बढ़ गए हैं, क्योंकि इस परियोजना से उद्यान का बड़ा हिस्सा डूब में आने वाला है.

इस प्रस्ताव को राज्य सरकार की सहमति के बाद जल्द ही राष्ट्रीय वन्य प्राणी बोर्ड को भेजने की तैयारी है.

सूत्रों के अनुसार, 22 सितंबर को राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक भोपाल में हुई थी. इस बैठक में केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना के पहले चरण को कुछ शर्तो के साथ मंजूरी देने पर सहमति बनी. बैठक में लिए गए फैसलों के सामने आए दस्तावेजों से पता चलता है कि बोर्ड ने सात शर्तो के साथ एक प्रस्ताव को राष्ट्रीय वन्य प्राणी बोर्ड को भेजने पर हामी भरी है.

बोर्ड द्वारा तय की गई शर्तो में कहा गया है कि परियोजना से डूब में आने वाले उद्यान कोर क्षेत्र (बाघ की उपस्थिति का मुख्य क्षेत्र) के एवज में अन्य क्षेत्र को जोड़ा जाए, कोर क्षेत्र में जोड़े जाने वाले क्षेत्र में स्थित गांव का परियोजना के व्यय से पुनर्वास किया जाए, बांध निर्माण के दौरान श्रमिकों को राष्ट्रीय उद्यान से बाहर रखते हुए बांध निर्माण में उत्खनित सामग्री के अलावा अतिरिक्त निर्माण सामग्री को उद्यान के बाहर से लाया जाए.

इसके अलावा गिद्ध के रहवास पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जाए और बांध के नीचे केन नदी के इकोलॉजिकल प्रवाह को सुनिश्चित किया जाए.

ज्ञात हो कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में नदी जोड़ो अभियान को मूर्तरूप देने की कोशिश हुई थी. इसमें दो राज्यों उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की केन-बेतवा लिंक परियोजना भी शामिल थी. केंद्र में भाजपा के फिर सत्ता आने के बाद इस परियोजना को पूरा करने के प्रयास तेज हुए हैं.

लगभग छह हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना के पहले चरण से पन्ना राष्ट्रीय उद्यान को सबसे ज्यादा प्रभावित होना है, उद्यान का बड़ा हिस्सा डूबेगा, क्योंकि यहा नदियों को जोड़कर बांधों का निर्माण किया जाना है. इस परियोजना में उद्यान के लगभग 40 फीसदी हिस्से के प्रभावित होने की आशंका है. साथ ही 13 लाख पेड़ों के डूबने की आशंका बनी हुई है.

सामाजिक संस्था ‘प्रयत्न’ के सचिव अजय दुबे ने कहा है कि ‘छह हजार करोड़ की परियोजना के लिए राज्य के जल संसाधन और वन विभाग के अधिकारियों के मुंह से लार टपक रही है और यही कारण है कि उन्होंने अंधे होकर 32 बाघों के साथ हजारों वन्य प्राणियों के जीवन को खतरे मे डाल दिया है.’

दुबे ने दावा किया कि ‘राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के सहमतिपत्र को पर्यावरण विरोधी शिवराज सरकार ने चुपचाप तरीके से पन्ना राष्ट्रीय उद्यान को उजाड़ने वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना को अनुमति देकर भारत सरकार को भेज दिया है.’

वहीं प्रधान वन संरक्षक रवि श्रीवास्तव ने कहा कि अभी बोर्ड की बैठक का प्रस्ताव राष्ट्रीय वन्य प्राणी बोर्ड को नहीं भेजा गया है. प्रस्ताव को भेजने की प्रक्रिया जारी है.

यहां बताना लाजिमी होगा कि पन्ना राष्ट्रीय उद्यान वह है, जो अब से छह वर्ष पूरा दूसरा सरिस्का बन गया था, जहां एक भी बाघ नहीं बचा था. वर्ष 2009 में अमल में लाई गई बाघ पुनस्र्थापना परियोजना के सफल होने पर इस उद्यान में अब 32 बाघ हो गए हैं.

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