महानदी: छत्तीसगढ़-ओड़िशा की बैठक

रायपुर | संवाददाता: महानदी विवाद पर छत्तीसगढ़ तथा ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की बैठक दिल्ली में होगी. यह बैठक सितंबर माह के दूसरे सप्ताह में होने की संभावना है. इस बैठक की अध्यक्षता केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती करेंगी. उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर ओड़िशा में राजनीति तेज है तथा वहां छत्तीसगढ़ में बनाये गये बैराजो का विरोध हो रहा है. इस सिलसिले में ओड़िशा का एक प्रतिनिधिमंडल छत्तीसगढ़ का दौरा करके भी गया है.

छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ में दोनों राज्यों के जन संगठनों की एक संयुक्त बैठक हुई थी जिसमें तय किया गया कि दोनों राज्यों के जन संगठन मिलकर महानदी के दोनों किनारों में पैदल यात्रा करेंगे. उस बैठक में यह बात उभर कर आई कि महानदी के पानी को लेकर विवाद दरअसल दोनों राज्यों के कारोबारियों का है, दोनों राज्यों की जनता को तो महानदी जोड़ती है.

गुरुवार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के निवास में दिल्ली में प्रस्तावित बैठक के सिलसिले में अधिकारियों की बैठक हुई. जिसमें अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि महानदी पर ओड़िशा में हीराकुद बांध वर्ष 1957 में बना था. वर्ष 1983 में तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और ओड़िशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री जानकी वल्लभ पटनायक के बीच दोनों राज्यों के लिए महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर एक संयुक्त कंट्रोल बोर्ड बनाने के लिए समझौता हुआ था, लेकिन बोर्ड का गठन नहीं हो पाया.

हाल ही में 29 जुलाई 2016 को नई दिल्ली में केन्द्र सरकार द्वारा आयोजित दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव ने संयुक्त कंट्रोल बोर्ड बनाने की सहमति प्रदान कर दी, लेकिन ओड़िशा सरकार की ओर से अब तक इसकी सहमति नहीं मिली है.

मुख्य सचिव स्तरीय इस बैठक में दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों ने इस बात पर भी सहमति जताई थी कि महानदी के पानी से जुड़े सभी तथ्यों का दोनों राज्य आदान-प्रदान करेंगे. इस आधार पर छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी ओर से सभी तथ्य ओड़िशा सरकार को केन्द्र के निर्धारित प्रारूप के अनुसार भेज दिये हैं, लेकिन ओड़िशा की ओर से जानकारी अब तक अप्राप्त है. इस बारे में ओड़िशा सरकार को स्मरण भी कराया गया है.

मुख्यमंत्री के साथ बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस बांध तक महानदी का जलग्रहण क्षेत्र छत्तीसगढ़ में लगभग 86 प्रतिशत है और हीराकुद बांध की कुल क्षमता 5400 एमसीएम है. हीराकुद बांध तक महानदी में पानी का औसत बहाव 40 हजार 773 एमसीएम है. इस पानी में छत्तीसगढ़ का योगदान 35 हजार 308 एमसीएम होता है. महानदी में पानी के इस बहाव (40 हजार 773 एमसीएम) को देखा जाये तो इससे हीराकुद जैसे सात विशाल जलाशयों को भरा जा सकता है.

गुरुवार की बैठक में अधिकारियों ने यह भी बताया कि महानदी का उदगम छत्तीसगढ़ में है, लेकिन छत्तीसगढ़ इसके सिर्फ 3.5 प्रतिशत पानी का ही इस्तेमाल कर रहा है, जबकि ओड़िशा 14 प्रतिशत पानी का उपयोग कर रहा है. इस प्रकार दोनों राज्य महानदी के सिर्फ 17.5 प्रतिशत पानी का ही इस्तेमाल कर रहे हैं और लगभग 82 प्रतिशत पानी व्यर्थ जा रहा है. महानदी के पानी से ओड़िशा की सिंचाई क्षमता लगभग 54 प्रतिशत है, जबकि छत्तीसगढ़ की 30 प्रतिशत है.

अधिकारियों ने बताया कि केन्द्रीय जल आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार की अरपा-भैंसाझार सिंचाई परियोजना को क्लीयरेंस देते हुए यह कहा है कि इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद भी महानदी में इतना पानी रहेगा, जिससे हीराकुद बांध को तीन बार भरा जा सकेगा. छत्तीसगढ़ में बसंतपुर के बाद केलो तथा मांड नदियां महानदी में मिलती हैं, जिसका पानी हीराकुद को सात बार भरने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है, जहां तक छत्तीसगढ़ में महानदी पर बनाए गए बैराजों का सवाल है तो इनका निर्माण बारिश के पानी को जमा करने के लिए किया गया है और इसमें कोई डायवर्सन वियर नहीं है, इसलिए महानदी के पानी को लेकर किसी भी प्रकार की आशंका नहीं की जानी चाहिए. मानसून के दौरान महानदी में 96 प्रतिशत पानी का बहाव होता है, जबकि शेष दिनों में इसमें केवल चार प्रतिशत पानी का बहाव होता है.

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