महानदी विवाद राजनीति प्रेरित: बृजमोहन

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा महानदी विवाद राजनीति से प्रेरित है. उन्होंने महानदी के पानी के उपयोग को लेकर ओडिशा में चल रही घटनाओं को राजनीति से प्रेरित बताया है. बृजमोहन अग्रवाल ने कहा महानदी का 82.5 प्रतिशत पानी बहकर समुद्र में चला जाता है ओडिसा को उसका उपयोग करना चाहिये. उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार महानदी के पानी के उपयोग के संबंध में वास्तविक तथ्यों की अनदेखी कर ओडिशा की जनता को गुमराह कर रही है. ओडिशा सरकार की मंशा इस मामले को लेकर राजनीतिक फायदा लेने की है.

छत्तीसगढ़ महानदी में औसत वार्षिक उपलब्ध जल का 3.5 प्रतिशत तथा ओडिशा 14 प्रतिशत पानी का उपयोग कर रहा है. शेष 82.5 प्रतिशत पानी बहकर समुद्र में चला जाता है. ओडिशा सरकार को इस पानी के उपयोग के लिए कार्य योजना बनाकर किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास करना चाहिए.


अग्रवाल ने कहा कि ओडिशा में विगत 50 वर्षो में केवल हीराकुंड बांध ही क्यों बनाया गया है, वहां की सरकारों ने ओडिशा के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कभी ठोस पहल नहीं की है. यह पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है.

अग्रवाल ने ओडिशा की जनता और बुद्धिजीवियों से अपील करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ओडिशा के बीच हमेशा सौहार्दपूर्ण संबंध रहा है और यह हमेशा बना रहेगा. महानदी के पानी को लेकर ओडिशा की जनता को चिंतित होने की जरूरत नहीं है. इस मामले में विवाद पैदा करने का कोई औचित्य नहीं है.

अग्रवाल ने कहा कि महानदी जल के बंटवारे लेकर आंदोलन से कोई हल नहीं निकलेगा. छत्तीसगढ़ सरकार इस मामले में साझा बातचीत करने को तैयार है परंतु ओडिशा सरकार की इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई दे रही है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने यहां के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रखी है. छत्तीसगढ़ सरकार सिंचाई के लिए 27 स्ट्रक्चर बनाकर महानदी के पानी का नियमानुसार समुचित उपयोग कर रही है.

जल संसाधन मंत्री अग्रवाल ने केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि हीराकुंड बांध में पिछले 10 सालों में पानी की कोई कमी नहीं है न ही भविष्य में इस तरह की समस्या आने वाली है. उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान महानदी में पानी बहकर समुद्र में जाता है उसके समुचित उपयोग के लिए ओडिशा सरकार को प्रयास करनी चाहिए.

अग्रवाल ने कहा कि तत्कालीन मध्यप्रदेश और ओडिशा राज्य के बीच 28 अप्रैल 1983 को हुए अनुबंध में एक संयुक्त नियंत्रण बोर्ड गठित कर दोनों राज्यों के माध्यम से सर्वेक्षण, अनुसंधान निष्पादन एवं अन्य मुद्दों के निपटारे के लिए किया जाना था.

संयुक्त नियंत्रण बोर्ड का गठन अभी तक नहीं हुआ है. छत्तीसगढ़ संयुक्त नियंत्रण बोर्ड के गठन के लिए सहमति प्रदान कर चुका है.

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