महाराष्ट्र का ऊंट किस करवट बैठेगा?

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: महाराष्ट्र में भाजपा किसके सहयोग से सरकार बनाएगी इस पर अभी भी संशय कायम है. महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा को सबसे ज्यादा मत मिलने के बावजूद भी वह अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती है क्योंकि 288 सदस्यों वाली विधानसभआ में उसे 122 सीटें ही मिली हैं. भाजपा की गाड़ी महाराष्ट्र में 23 सीटों के कारण अटक गई है. विधानसभा के पूरे नतीजें आने के पहले ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने घोषणा कर दी कि वह भाजपा को बाहर से समर्थन देगी. दिल्ली में हुई भाजपा के संसदीय बोर्ड ने हालांकि इसके आधार पर सरकार बनाने का दावा पेश करने की कोई घोषणा नहीं की है. राकांपा को 41 सीटें मिली हैं. यदि इनके बाहरी समर्थन के आधार पर भाजपा राज्य में सरकार बना लेती है तो उसके पास कुल 163 विधायकों का आकड़ा हो जायेगा.

भाजपा ने इस पर अभी तक अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की है और न ही इसे सार्वजनिक तौर पर खारिज किया है. सू्त्रों की माने तो राकांपा के बाहर से समर्थन देने के पीछे कुछ और ही कहानी है. कयास लगाये जा रहें हैं कि राकांपा समर्थन के बदले में अजित पवार तथा छगन भुजबल के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरों के कथित फाइलों पर कार्यवाही न करने की गारंटी चाहती है. उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने चुनाव प्रचार में एनसीपी पर नेशनल करप्ट पार्टी का जुमला जड़ा था. ऐसे में उसी एनसीपी के समर्थन से सरकार बनाना भाजपा के लिये भ्रष्ट्राचार से समझौता करना माना जायेगा. जाहिर है कि जम्मू-कश्मीर, झारखंड तथा पश्चिम बंगाल में विधानसभा के होने वाले चुनाव को देखते हुए भाजपा ऐसा जोखिम लेना कभी नहीं चाहेगी.


दूसरी तरफ, सूत्रों से छनकर जो खबरें आ रहीं हैं उसके अनुसार शिवसेना, भाजपा को समर्थन देने के बदले में उप मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, वित्तमंत्री तथा पीडब्लूडी का मंत्रालय चाहती है. भाजपा ने शिवसेना को कहलवा दिया है कि वर्ष 1995 का फार्मूला वर्ष 2014 में लागू नहीं होता है. यदि समर्थन करना है तो 2014 के स्थिति के अनुसार किया जाये. शिवसेना के लिये मजबूरी यह है कि वह इतने सालों के बाद आने वाले सत्ता सुख से इंकार नहीं करना चाहेगी वहीं दूसरी तरफ उनकी जिद है कि भाजपा को समर्थन के बदले अच्छा-खासा मूल्य वसूला जाये.

यदि शिवसेना, भाजपा को समर्थन करती है तो आकड़ा सम्मानजनक 185 विधायकों का हो जाता है परन्तु प्रधानमंत्री मोदी तथा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इतने जल्दी नरम पड़ जायेंगे इसमें शक है. शायद यही कारण है कि भाजपा के नेता किरीट सोमैया ने एक खबरिया चैनल पर सोमवार को दावा किया है कि उनके पास 135 विधायकों का समर्थन है. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया है कि किनके समर्थन से 135 के आकड़े का दावा किया जा रहा है.

किरीट सोमैया के बयान के बाद इस बात के कयास लगाये जा रहें हैं कि भाजपा छोटे दलों तथा निर्दलियों का समर्थन ले सकती है. महाराष्ट्र विधानसभा में छोटे दलों के 13 विधायक तथा निर्दलियों के 7 विधायक हैं. जिसमें से 1 विधायक सीपीएम का है जो भाजपा को समर्थन देने से रहा. इस प्रकार सीपीएम को छोड़कर 19 विधायक हुए जिनके समर्थन से भाजपा का आकड़ा 141 तक पहुंच सकता है बशर्ते कोई और दल टांग न अड़ाये.

1-2 दिन में महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति साफ हो जायेगी. जब तक इंतजार करना पड़ेगा कि महाराष्ट्र का राजनीतिक ऊंट किस करवट बैठता है. इसमें सभी के अपने-अपने दावें तथा लाभ-हानि के गणित हैं. हां, इतना तय है कि मुख्यमंत्री भाजपा से ही होगा.

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