शिवसेना का ऊंट, भाजपा से दूर

मुंबई | संवाददाता: शिवसेना ने महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष में बैठने का अल्टीमेटम दिया है. रविवार को शाम 7.20 बजे शिवसेना भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भाजपा, एनसीपी का समर्थन लेती है तो उनकी पार्टी विपक्ष में बैठेगी. इसी के साथ शिवसेना के विधायक दल के नेता एकनाथ शिंदे को चुन लिया गया तथा दिल्ली में मोदी सरकार में शपथ लेने जा रहे अनिल देसाई को दिल्ली एयरपोर्ट से वापस बुला लिया गया. इससे जाहिर है कि शिवसेना का ऊंट आसानी से भाजपा के पहाड़ के नीचे नहीं आने वाला है. शिवसेना भवन में संवाददाताओं से उद्धव ठाकरे ने कहा, “हम प्रदेश में स्थिर सरकार चाहते हैं. हिंदुत्ववादी पार्टियों का एक साथ रहना देश के हित में है. लेकिन शरद पवार ही वह शख्स हैं जिन्होंने भगवा आतंकवाद जैसा शब्द दिया था. फिर भी भाजपा उनके साथ जाना चाहती है तो जाए. लेकिन शिवसेना कट्टर और प्रखर हिंदुत्ववादी पार्टी है. वह हिंदुत्व का मुद्दा नहीं छोड़ेगी और ऐसी स्थिति में विपक्ष में बैठेगी.”

उल्लेखनीय है कि शिवसेना ने महाराष्ट्र में फड़णवीस सरकार में अपने विधायकों को शामिल होने नहीं दिया है. खबरों के अनुसार शिवसेना ने उप-मुख्यमंत्री का पद तथा 12 मंत्री मांगे हैं जाहिर है कि भाजपा बड़े भाई की भूमिका में आ गई है तथा शिवसेना की मांग के आगे झुकने को तैयार नहीं है. वहीं, शिवसेना ने अनिल देसाई को दिल्ली एयरपोर्ट से वापस बुलवाकर अपने रुख पर कायम रहने का संकेत दे दिया है. रविवार के संवाददाता सम्मेलन से पहले शिवसेना के विधायक दल की बैठक के बाद इस बात की उम्मीद की जा रही थी कि शिवसेना कोई बड़ा कदम उठाने की घोषणा कर सकती है परन्तु उद्धव ठाकरे के हावभाव से स्पष्ट था कि उनकी पार्टी अभी भी भाजपा के दबाव में है.


गौरतलब है कि संसदीय राजनीति में चुनाव, सत्ता पर काबिज होने के लिये लड़ी जाती है तथा शिवसेना भी इसकी अपवाद नहीं है. वरन् शिवसेना ने तो महाराष्ट्र के चुनाव के पहले ही मुख्यमंत्री के पद का दावा करते हुए भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया था. चुनाव परिणाम आने के बाद पता चला कि भाजपा सदन में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. इससे शिवसेना की सारी रणनीति धरी की धरी रह गई. तभी एनसीपी से भाजपा को बाहर से समर्थन देने की घोषणा कर शिवसेना की रही सही कसर को भी निकाल दिया है. जाहिर है कि अब भाजपा को महाराष्ट्र विधानसभा में विश्वास मत पाने में कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा.

वैसे भाजपा भी जानती है कि एनसीपी अपने समर्थन का पूरा मूल्य वसूल कर लेगी. इसी कारण से भाजपा, शिवसेना को महाराष्ट्र मंत्रीमंडल में अपनी शर्तो पर शामिल करना चाहती है परन्तु शिवसेना का ऊंट है कि भाजपा के पहाड़ के नीचे आने को तैयार ही नहीं है. उसने ऐन वक्त पर अनिल देसाई को मोदी सरकार में शपथ लेने से रोक दिया तथा ‘एकला चलो रे’ की नीति पर चलने की घोषणा कर दी है. राजनीति है, इसका ऊंट बहुत सोच-समझ के करवट बदलता है इसलिये अभी इंतजार करना पड़ेगा.

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