गांधी के हत्यारे का मनेगा बलिदान दिवस

नई दिल्ली | संवाददाता: भारत में गांधी के हत्यारे गोडसे का बलिदान दिवस मनाने की तैयारी पूरी हो गई है. महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का बलिदान दिवस ऐसे समय में मनाने की तैयारी चल रही है, जब ब्रिटेन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महात्मा गांधी की तारीफ़ में कसीदे काढ़ रहे हैं.

अखिल भारतीय हिंदी महासभा के सदस्य नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या की थी. घांधी के इस हत्यारे की याद में हिंदू महासभा 15 नवंबर को बलिदान दिवस मनाने की तैयारी कर रही है. इसकी तैयारी पूरी हो चुकी है.


हिंदू महासभा के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश कौशिक के अनुसार देश भर में संगठन के 120 कार्यालय हैं और इन सभी कार्यालयों को साफ निर्देश दिया जा चुका है कि नाथूराम गोडसे की स्मृति में आयोजित बलिदान दिवस को धूमधाम से मनायें. संगठन इस दिन गोडसे की प्रतिमा की स्थापना की तैयारी में है.

गौरतलब है कि नाथूराम गोडसे एक ब्राह्मण परिवार से थे और उन्होंने 30 जनवरी 1948 को गांधी की गोली मार कर हत्या कर दी थी. गोडसे ने गांधी की हत्या के लिये कई तर्क दिये थे.

गोडसे ने गांधी की हत्या को जायज ठहराते हुये कहा था कि -32 साल तक विचारों में उत्तेजना भरने वाले गांधी ने जब मुस्लिमों के पक्ष में अपना अंतिम उपवास रखा तो मैं इस नतीजे पर पहुंच गया कि गांधी के अस्तित्व को तुरंत खत्म करना होगा. गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लोगों को हक दिलाने की दिशा में शानदार काम किया था, लेकिन जब वे भारत आए तो उनकी मानसिकता कुछ इस तरह बन गई कि क्या सही है और क्या गलत, इसका फैसला लेने के लिए वे खुद को अंतिम जज मानने लगे. अगर देश को उनका नेतृत्व चाहिए तो यह उनकी अपराजेयता को स्वीकार्य करने जैसा था. अगर देश उनके नेतृत्व को स्वीकार नहीं करता तो वे कांग्रेस से अलग राह पर चलने लगते.

हालांकि तत्कालीन दस्तावेज बताते हैं कि नाथूराम गोडसे ने गांधी की हत्या के लिये जितने तर्क दिये थे, वे महज उत्तेजना और आधी-अधुरी जानकारी के आधार पर थे और तथ्यों के साथ उनका कोई सामंजस्य नहीं था. यही कारण है कि नाथूराम की इस हत्या को एक सनक की तरह देखा गया.

नाथूराम के जन्म का नाम रामचन्द्र था. नाथूराम के जन्म से पहले इनके माता-पिता की सन्तानों में तीन पुत्रों की अल्पकाल में ही मृत्यु हो गयी थी केवल एक पुत्री ही जीवित बची थी. इसलिये इनके माता-पिता ने ईश्वर से प्रार्थना की थी कि यदि अब कोई पुत्र हुआ तो उसका पालन-पोषण लड़की की तरह किया जायेगा. इसी मान्यता के कारण इनकी नाक बचपन में ही छेद दी और नाम भी बदल दिया. नाथूराम का लालन-पालन लड़की की तरह हुआ. कई लोगों की राय है कि नाथूराम के भीतर यह ग्रंथी भी थी कि उन्हें लड़की की तरह पाला-पोसा गया.

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