मदनी के बोल पर मचा बवाल

नई दिल्ली | संवाददाता: जमीयत-ए-उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख सैयद महमूद मदनी के मोदी को लेकर दिए गए वक्तव्य से बवाल मच गया है. मामले के तूल पकड़ने के बाद मदनी ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने न कभी नरेंद्र मोदी का समर्थन किया है और न ही भविष्य में ऐसा करेंगे.

मुस्लिमों के बड़े नेताओं में शामिल मदनी ने कहा था कि धर्मनिरपेक्ष पार्टियां किसी का डर दिखाकर मुसलमानों का वोट हासिल करने की भी कोशिश न करे. मदनी का ‘किसी व्यक्ति’ से तात्पर्य गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से और `धर्मनिरपेक्ष पार्टी’ से कांग्रेस से था.

टाइम्स नाउ चैनल से बातचीत में मदनी ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को किसी नकारात्मक नारे पर वोट नहीं मांगना चाहिए.

मदनी ने यह भी कहा कि मुस्लिम पाँच राज्यों में होने वाले चुनावों में सबक सिखा सकती है इसीलिए कांग्रेस को किसी का डर पैदा करके मुस्लिम वोट जुटाने के बजाय कम्युनिटी की भलाई के लिए काम करना चाहिए अपने बयान में पूर्व राज्यसभा सांसद मदनी ने कहा, “मुसलमानों को डरने की जरूरत नहीं है. धर्मनिपेक्षता देश की जड़ों में है और सांप्रदायिक ताकतें कभी देश की आम जनता का दिल नहीं जीत सकती.”

मदनी के इस बयान के सामने आने के बाद देश की सियासय गरमा गई. जहां एक ओर भाजपा मोदी को मिले सहारे से खुश दिखी वहीं कांग्रेस इस पर कुछ भी स्पष्ट तरीके से कहने से बच रही है. कुछ अन्य दलों ने मदनी के इस बयान से असहमति भी जताई है.

अब इस पर मदनी ने सफाई देते हुए कहा है कि `जयपुर में दिए गए मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया. मैंने सिर्फ यही कहा था कि कांग्रेस ये न समझे कि मुसलमान सिर्फ उसे वोट देंगे. कांग्रेस इस भ्रम में न रहे कि मोदी का डर पैदा करने से उसे मुस्लिम समुदाय का वोट मिल जाएगा.’

उन्होंने कहा कि `खुद को सेकुलर बताने वाली पार्टियां को मुस्लिम समुदाय को लेकर अपना एजेंडा बताना चाहिए. उन्होंने मुस्लिमों के लिए क्या-क्या किया और आगे क्या करने का प्लान है. वो इस बुनियाद पर वोट लेने की कोशिश करें न कि किसी का डर दिखाकर.’

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