मलेरिया के बजट में दो तिहाई की कमी

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में मलेरिया उन्मूलन का बजट एक तिहाई कर दिया गया है. केंद्र सरकार के इस कदम से राज्य में इस बीमारी की रोकथाम को लेकर किये जा रहे कार्यक्रमों को तगड़ा झटका लगा है.

छत्तीसगढ़ में मच्छरों से होने वाली बीमारी से हर साल लाखों लोग प्रभावित होते हैं. आंकड़ों की मानें तो बस्तर में सुरक्षा बलों के जवान माओवादियों से कहीं अधिक तरह-तरह की बीमारियों से मारे जाते हैं, जिसमें मच्छरों से होने वाली मौत को सबसे गंभीर समस्या माना जाता है.


रिपोर्ट के मुताबिक 2015-16 में नक्सली ऑपरेशन में सिर्फ 36 जवान शहीद हुए हैं. वहीं 2015-16 में हार्ट अटैक, मलेरिया, डेंगू, डिप्रेशन और आत्महत्या के चलते 903 जवानों की मौत हुई है. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक जहां 2015 में हार्ट अटैक, मलेरिया, डेंगू और डिप्रेशन के चलते सीआरपीएफ के 407 जवानों की मौत हुई तो 2016 में इन मौतों का आंकड़ा बढ़कर 476 हो गया है.

लेकिन इन परिस्थितियों के बाद भी केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में मलेरिया उन्मूलन की रकम एक तिहाई कर दी है.

राज्य सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 2015-16 में केंद्र सरकार ने इश बीमारी के उन्मूलन के लिये राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 1536.83 लाख रुपये छत्तीसगढ़ को देती थी. अगले साल यह आंकड़ा आधे से भी कम हो गया.

2016-17 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इस बीमारी के लिये उन्मूलन के लिये केवल 663.05 लाख रुपये केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को दिये. लेकिन इसके बाद केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के मलेरिया उन्मूलन के बजट में और कमी कर दी.

हालत ये है कि 2017-18 में यह आंकड़ा और नीचे लुढ़क गया और इस साल केवल 488.20 लाख रुपये का बजट ही छत्तीसगढ़ को दिया गया. ऐसे में छत्तीसगढ़ में मलेरिया उन्मूलन का कार्यक्रण कैसे चलेगा, यह समझ पाना आसान नहीं है.

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