दंतेवाड़ा सुकमा में बढ़ गया कुपोषण

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सुकमा और दंतेवाड़ा में कुपोषण और बढ़ गया है. तमाम सरकारी दावों के बावजुद राज्य के आदिवासी ज़िलों में कुपोषित बच्चों की संख्या का बढ़ना चिंताजनक है.

राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री रमशीला साहू का दावा है कि वर्ष 2003-04 में राज्य में 21 हजार 125 आंगनबाड़ी केन्द्र थे, जिनकी संख्या आज की स्थिति में 50 हजार से अधिक हो गई है, वहीं इन केन्द्रों में पौष्टिक आहार और टीकाकरण जैसी स्वास्थ्य सेवाओं से लाभान्वित होने वाले बच्चों और उनकी शिशुवती तथा गर्भवती माताओं की संख्या 17 लाख 50 हजार से बढ़कर वर्तमान में 27 लाख तक पहुंच गई है.


राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2005-06 में राज्य में कुपोषण की दर 47.1 प्रतिशत थी, जो वह 2015-16 में घटकर 37.7 प्रतिशत और वर्ष 2016 में 30 प्रतिशत के आसपास रह गई.

लेकिन इन आंकड़ों से अलग दंतेवाड़ा और सुकमा ज़िले में हालात अलग हैं. महिला एवं बाल विकास विभाग के ही आंकड़े बता रहे हैं कि इन दो आदिवासी ज़िलों में कुपोषण बढ़ा है. वजन त्यौहार के दौरान जुलाई 2016 में दंतेवाड़ा में कुपोषित बच्चों की संख्या 9455 थी लेकिन नवंबर 2017 में यह आंकड़ा बढ़ कर 9600 हो गया.

इसी तरह सुकमा में वजन त्यौहार जुलाई 2016 में 9821 बच्चे कुपोषित पाये गये थे लेकिन नवंबर 2017 में कुपोषित बच्चों की यह संख्या 11735 हो गई.

ताज़ा बजट में सरकार ने जो प्रावधान किया है, उसके अनुसार राज्य के 27 लाख बच्चों, किशोरियों और महिलाओं के कुपोषण मिटाने के लिये औसत 7.45 रुपये प्रति व्यक्ति, प्रति दिन खर्च करने का लक्ष्य रखा है. जाहिर है, 7.45 पैसे में किस हद तक कुपोषण मिटेगा यह बहस का विषय हो सकता है. लेकिन यह सुखद है कि यह रकम पिछले साल तक कुपोषण मिटाने के नाम पर खर्च होने वाली 5.10 रुपये से कहीं अधिक है.
*तस्वीरः सांकेतिक

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