चीन से सीमा के मुद्दे पर चर्चा करेगें मनमोहन

मास्को | एजेंसी: चीन में मनमोहन सिंह की अपने समकक्ष ली केकियांग के साथ होने वाली बैठक में सीमा विवाद का मुद्दा शीर्ष पर होगा. मंगलवार को भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रूस से चीन के लिये रवाना हुए.

उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सोमवार को साढ़े चार घंटे की निर्धारित बातचीत की और इस बैठक ने दोनों देशों के रिश्ते की प्रगाढ़ता को दर्शाया.

दो देशों की यात्रा पर रवाना होने से पहले उन्होंने कहा था कि भारत और चीन साथ-साथ सीमा पर शांति स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण सहमति तक पहुंचे हैं और भारत-चीन सीमा के सवाल को सुलझाने की दिशा में शुरुआती प्रगति हुई है.

उन्होंने कहा कि दोनों देशों की अपनी-अपनी चिताएं है जिन पर मित्रता एवं सहयोग के वातावरण को प्रभावित किए बिना ईमानदारी और परिपक्वता के साथ ध्यान दिया जा रहा है.

भारत और चीन की सेना के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर युद्ध की स्थिति से बचने के लिए तैयार किए गए सीमा सुरक्षा सहयोग समझौता के भी इस बैठक में मुद्दा रहने की संभावना है. सीमा सुरक्षा सहयोग समझौता की अंतिम रूपरेखा को सुरक्षा पर गठित मंत्री मंडलीय समिति ने पिछले सप्ताह मंजूरी दे दी है.

जल बंटवारा, व्यापार के प्रतिकूल आंकड़े और वीजा का मसला भी इस बैठक में उठाए जाने की संभावना है.

मनमोहन सिंह की चीन यात्रा से पहले इसके विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनिंग ने कहा कि चीन प्रधानमंत्री की यात्रा का इंतजार कर रहा है.

नियमित प्रेस वार्ता के दौरान सोमवार को उन्होंने कहा था कि भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा भारत-चीन की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चीनी प्रधानमंत्री की मई में हुई भारत यात्रा के बाद हो रही है.

मनमोहन सिंह चीन के राष्ट्रपति जी जिनपिंग से मुलाकात कर ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल में बुधवार को संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करेंगे. वह स्वदेश लौटने से पहले गुरुवार को कम्युनिस्ट पार्टी के सेंट्रल पार्टी स्कूल को भी संबोधित करेंगे. गौर तलब है कि भारत तथा चीन के बीच मैकमोहन रेखा को लेकर विवाद है तथा गोनों देश एक युद्ध भी लड़ चुके हैं.

सीमा विवाद

1962 के भारत-चीन युद्ध को भारत चीन सीमा विवाद के रूप में भी जाना जाता है. चीन में 1959 के तिब्बती विद्रोह के बाद जब भारत ने दलाई लामा को शरण दी तो भारत चीन सीमा पर हिंसक घटनाओं का एक श्रृंखला शुरू हो गयी. भारत ने फॉरवर्ड नीति के तहत मैकमोहन रेखा से लगी सीमा पर अपनी सैनिक चौकियों रखी जो 1959 में चीनी प्रीमियर झोउ एनलाई के द्वारा घोषित वास्तविक नियंत्रण रेखा के पूर्वी भाग के उत्तर में थी.

मैकमोहन रेखा

1914 में शिमला में उस समय के ब्रिटिश भारत सम्राज्य, तिब्बत और चीन के बीच तिब्बत की स्थिति को निर्धारित करने के लिये विवादित समझौता हुआ था. बाद में चीन इस बातचीत से हट गया था और इस समझौते की शतरे को मानने से इंकार कर दिया था. इसी समझौते के तहत ब्रिटिश भारत और तिब्बत की सीमा को निर्धारित करने के लिये इस समझौते को कराने वाले ब्रिटिश सचिव सर मैकमोहन के नाम पर मैकमोहन रेखा बनाई गई. भारत जहां इस रेखा को तिब्बत और चीन से अधिकारिक सीमा मानता है वहीं चीन इसे अवैध करार देता रहा है.


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