अमरीकी निवेश को आकर्षित करेंगे मनमोहन

वाशिंगटन | एजेंसी: अगले शुक्रवार को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ अपने बैठक में मनमोहन सिंह को आपसी सहयोग और निवेश पर खाका तैयार करने का अवसर मिलेगा. ऐसा अमरीकी अधिकारियों का कहना है.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जोश अर्नेस्ट ने ओबामा के साथ मिसौरी के कंसास शहर के एक दौरे के दौरान शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, “शिखर बैठक, क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता में भारत की भूमिका को रेखांकित करेगी. यह बैठक दोनों नेताओं को दोनों देशों के बीच संवर्धित व्यापार, निवेश, और विकसित सहयोग की दिशा में एक खाका तैयार करने का एक अवसर भी मुहैया कराएगी.”


अर्नेस्ट ने कहा कि व्हाइट हाउस में शुक्रवार को प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की 2009 में हुए वाशिंगटन दौरे और राष्ट्रपति ओबामा के 2010 में हुए भारत के यादगार दौरे के बाद होने जा रही है. गौर तलब है कि ओबामा ने भारत-अमरीका रिश्ते को 21वीं सदी की एक निर्धारक साझेदारी करार दिया है. उन्होंने मनमोहन सिंह को नवंबर 2009 में अपने राष्ट्रपति भवन में पहले राजकीय भोज के लिए आमंत्रित किया था.

उपराष्ट्रपति जो बिडेन और अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने मनमोहन सिंह के दौरे के लिए आधार तैयार करने हेतु हाल ही में भारत का दौरा किया था. उम्मीद की जा रही है कि मनमोहन सिंह का दौरा भारत-अमरीका के ऐतिहासिक असैन्य परमाणु समझौते के क्रियान्वयन, संवर्धित रक्षा सहयोग और अफगानिस्तान पर केंद्रित होगा.

यह परमाणु समझौता 2008 में हुआ था और भारत में कई बार इसे हमारी रणनीतिक साझेदारी का एक स्तंभ और हमारे बदल चुके रिश्ते का एक प्रतीक बताया गया है. लेकिन यह समझौता भारत में 2010 में पारित हुए सख्त परमाणु दायित्व कानून के कारण अवरुद्ध पड़ा हुआ है. यह कानून दुर्घटना की स्थिति में परमाणु आपूर्तिकर्ता को जिम्मेदार ठहराता है.

दोनों पक्ष अपने रक्षा संबंधों को, एक क्रेता-विक्रेता के रिश्ते से आगे निकलकर रक्षा सामग्रियों की डिजाइन, विकास और उत्पादन में एक संयुक्त साझेदारी तक ले जाने के रास्तों की भी तलाश करेंगे.

जैसा कि अमरीकी उप रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने इस सप्ताह अपने भारत दौरे के दौरान कहा था, “वे सिर्फ हमारे सामान खरीदना नहीं चाहते. वे हमारे साथ हमारे सामान विकसित करना चाहते हैं और वे हमारे साथ नई चीजें विकसित करना चहते हैं, और वे हमारे साथ अनुसंधान करना चाहते हैं.”

गौर तलब है कि भारत अपने भुगतान संतुलन की गड़बड़ी को कम करने के लिये विदेशी निवेश को बढ़ावा देना चाहता है. इसलिये मनमोहन सिंह की अमरीकी यात्रा से भारत को उम्मीद है कि इससे देश में निवेश का माहौल बनेगा.

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