नक्सली हमले में मारे गये हैं कई एसपी

नई दिल्ली | संवाददाता: झारखंड के पाकुड़ में नक्सली हमले में एसपी अमरजीत बलिहार से पहले भी नक्सलियों ने कई आईपीएस अफसरों की हत्या की है. नक्सलियों ने झारखंड के ही लोहरदगा में एसपी एजय सिंह को निशाना बनाया था. दुखद ये है कि अजय सिंह की हत्या के मामले में जिन 6 नक्सलियों को जिम्मेवार बताया गया था, वे सभी नक्सली साक्ष्य के अभाव में बरी हो गये. इसके अलावा छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में भी एसपी विनोद चौबे को नक्सलियों ने मार डाला था. मुंगेर में भी नक्सलियों ने एक आईपीएस अफसर को मार डाला था. आंध्र में भी आईजी की हत्या के आरोपी नक्सली बरी हो गये थे.

लोहरदगा के पेसरार गांव में 4 अक्टूबर 2000 को अजय सिंह एमसीसी के नक्सलियों की तलाश में पहुंचे थे, जहां नक्सलियों ने उन्हें घेर कर मार डाला था. नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाने वाले अजय सिंह की हत्या ने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया था. लेकिन इस मामले में जिन 6 नक्सलियों को नामजद किया गया था, वे सभी नक्सली सबूत के अभाव में बाइज्जत बरी हो गये.


इसी तरह नक्सलियों ने 12 जुलाई 2009 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में एसपी विनोद चौबे सहित 29 जवानों को मार डाला था. मदनवाड़ा में पुलिस बल पर हमले की सूचना पा कर पहुंचे विनोद चौबे को नक्सलियों ने चारों तरफ से घेर लिया था और फिर उन्हें गोलियों से भून दिया था. इस मामले में कुछ वरिष्ठ अधिकारी बाल-बाल बचे थे.

नक्सलियों ने 5 जनवरी 2005 को बिहार के मुंगेर में आईपीएस अफसर सुरेंद्र बाबू की हत्या कर दी थी. भीमबांध से लगे हुये लक्ष्मीपुर के जंगल में सुरेंद्र बाबू की गाड़ी को नक्सलियों ने उस समय लैंड माइंस लगा कर उड़ा दिया था, जब वे सर्चिंग ऑपरेशन के बाद अपने 6 पुलिसकर्मियों के साथ लौट रहे थे. मूलतः आंध्र प्रदेश के निवासी सुरेंद्र बाबू की हत्या को लेकर बिहार सरकार ने जांच कमेटी बनाई थी लेकिन मामले में आगे कुछ नहीं हो सका.

नक्सलियों ने 27 जनवरी 1993 को के एस व्यास को भी एलबी स्टेडियम में गोलियों से भून दिया था. इस वारदात को पीपुल्स वार ग्रूप के माओवादियों ने अंजाम दिया था. व्यास उस समय ग्रेहाउंड दस्ते में थे और बतौर डीआईजी उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ बड़े अभियान चलाये थे. शहर के बीचों बीच जॉगिंग कर रहे केएस व्यास की हत्या के मामले में पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था. लेकिन इस मामले में गिरफ्तार जिन नक्सलियों के खिलाफ मुकदमा चला, उन सभी 3 नक्सलियों को 20 नवंबर 2008 को साक्ष्य के अभाव में अदालत को बरी करना पड़ा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!